मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए. पिछले कुछ वर्षों से मनीष वर्मा आईएएस की नौकरी छोड़कर नीतीश कुमार के साथ काम कर रहे थे और मंगलवार को मनीष वर्मा जनता दल यूनाइटेड में शामिल हुए.
जनता दल यूनाइटेड में शामिल होने के बाद माना जा रहा है कि मनीष वर्मा को पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है. चर्चा इस बात की भी है कि नीतीश कुमार ने मनीष वर्मा के रूप में अपना उत्तराधिकारी भी ढूंढ लिया है.
नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा से हैं मनीष वर्मा
मनीष वर्मा 2000 बैच के उड़ीसा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और नीतीश कुमार के बेहद खास माने जाते है. मनीष वर्मा नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के रहने वाले हैं और दिलचस्प बात यह है कि मनीष वर्मा नीतीश कुमार के स्वजातीय भी हैं यानी कि दोनो कुर्मी समाज से ही आते हैं.
आईएएस बनने के बाद मनीष वर्मा की सबसे पहले पोस्टिंग उड़ीसा के कालाहांडी में सब कलेक्टर के रूप में हुई थी. 2012 में अंतर राज्यीय प्रतिनियुक्ति के तहत नीतीश कुमार मनीष वर्मा को उड़ीसा से बिहार लेकर आए और तब से ही वह नीतीश कुमार के चहेते अधिकारियों में से एक रहे हैं.
बिहार आने के बाद मनीष वर्मा ने पूर्णिया और पटना में जिलाधिकारी के महत्वपूर्ण पद पर भी काम किया था. वे मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं.
2018 में आईएएस की नौकरी से VRS
2017 में बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद 2018 में मनीष वर्मा ने आईएएस की नौकरी से VRS ले लिया था और तब से ही इस बात की अटकलें लगाई जा रही थी कि वह जल्द ही राजनीति में एंट्री करेंगे, हालांकि, उसे वक्त ऐसा नहीं हुआ और अब तकरीबन 6 साल के बाद मनीष वर्मा ने अंततः राजनीति में एंट्री करने का फैसला किया और जनता दल यूनाइटेड का दामन थाम लिया.
आईएएस की नौकरी छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मनीष वर्मा को बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का सदस्य भी बनाया था और हाल के दिनों तक वह मुख्यमंत्री के आधारभूत संरचना सलाहकार भी रहे.
राष्ट्रीय महासचिव बनने की चर्चा
मनीष वर्मा के जनता दल यूनाइटेड में शामिल होने के बाद अब इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि उन्हें पार्टी में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है. चर्चा है कि मनीष वर्मा को जनता दल यूनाइटेड में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बनाया जा सकता है.
गौरतलब है, मनीष वर्मा से पहले एक समय में पूर्व आईएएस अधिकार रामचंद्र प्रसाद सिंह भी नीतीश कुमार के संपर्क में आए थे और फिर उन्होंने नीतीश कुमार के साथ काफी वर्षों तक करीबी रूप से काम किया. आरसीपी सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी थे. आरसीपी नालंदा के ही रहने वाले थे और नीतीश कुमार के जाति से आते थे. 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह बिहार आ गए और नीतीश कुमार के प्रधान सचिव का रूप में काम किया.
आरसीपी सिंह 2010 में जदयू में शामिल हुए
माना जाता है कि नीतीश कुमार के कहने पर ही आरसीपी सिंह ने 2010 में आईएएस की नौकरी से VRS ले लिया और राजनीति में प्रवेश किया और जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए. आरसीपी सिंह 2010 से 2022 तक जनता दल यूनाइटेड के राज्यसभा सांसद रहे. 2020 में नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को जनता दल यूनाइटेड का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना दिया.
माना जाता है कि नरेंद्र मोदी सरकार में 2021 में केंद्रीय मंत्री बनने के जिद के कारण उनकी और नीतीश कुमार के बीच केमिस्ट्री बिगड़ गई थी और फिर 2022 में नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी से यह कह कर निकाल दिया था कि वह बीजेपी के साथ मिलकर जनता दल यूनाइटेड को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे. जिस दौरान नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के रिश्ते काफी मधुर थे और आरसीपी को पार्टी में सर्वे-सर्वा माना जाता था उसे दौरान भी उन्हें नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी के रूप में ही देखा जा रहा था.
इसी बीच 2015 में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी नीतीश कुमार के संपर्क में आए थे और 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के लिए काम किया था. उस दौरान प्रशांत किशोर को भी नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता था और चर्चा होती थी कि शायद नीतीश कुमार प्रशांत किशोर में अपना उत्तराधिकारी ढूंढ लिया है.
2015 बिहार विधानसभा में जीत के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को अपना महत्वाकांक्षी सात निश्चय कार्यक्रम को लागू करने की जिम्मेदारी सौंप दी थी और फिर 2018 में नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को जनता दल यूनाइटेड में शामिल कराया था और फिर पार्टी का उपाध्यक्ष भी बना दिया था. इसके बाद फिर प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार के संबंध बिगड़ने लगे और फिर 2020 जनवरी में नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को पार्टी से निकाल दिया.
प्रशांत किशोर और रामचंद्र प्रसाद सिंह से पहले एक वक्त में उपेंद्र कुशवाहा भी नीतीश कुमार के गरीबी लोगों में से माने जाते थे और उन्हें भी नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था मगर वह भी कई बार जनता दल यूनाइटेड में शामिल हुए और नीतीश कुमार से नाराज होकर पार्टी छोड़ी और फिलहाल नीतीश कुमार से अलग अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष है.