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जीतनराम मांझी ने 'माउंटेन मैन' को भारत रत्न दिए जाने की मांग की, बोले- अलग-अलग कटोरा लेकर घूमने से नहीं मिलेगा हक

जीतनराम मांझी ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति की कुल आबादी 30 प्रतिशत से भी अधिक है, लेकिन सत्ता में उनकी हिस्सेदारी नगण्य है. उन्होंने कहा कि बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमें एकजुट रहने का मंत्र दिया था, लेकिन आज दलित समाज उपजातियों में बंटकर अपनी ताकत कमजोर कर चुका है. मांझी ने कहा कि अलग-अलग कटोरा लेकर घूमने से हक नहीं मिलेगा.

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जीतनराम मांझी (फाइल फोटो)
जीतनराम मांझी (फाइल फोटो)

बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा द्वारा आयोजित दलित समागम में पार्टी संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने दलित समुदाय को एकजुट होकर 2025 के विधानसभा चुनाव में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया. मांझी ने अपने संबोधन की शुरुआत माउंटेन मैन दशरथ मांझी को भारत रत्न देने की मांग के साथ की और कहा कि दशरथ मांझी जैसे व्यक्तित्व को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिलना चाहिए.

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इस दौरान जीतनराम मांझी ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति की कुल आबादी 30 प्रतिशत से भी अधिक है, लेकिन सत्ता में उनकी हिस्सेदारी नगण्य है. उन्होंने कहा कि बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमें एकजुट रहने का मंत्र दिया था, लेकिन आज दलित समाज उपजातियों में बंटकर अपनी ताकत कमजोर कर चुका है. मांझी ने कहा कि अलग-अलग कटोरा लेकर घूमने से हक नहीं मिलेगा, हमें मिलकर अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ानी होगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में दलित समाज को एकजुट होकर ऐसी सरकार बनानी होगी, जो दलित हितों के संरक्षण और उनकी भलाई के लिए काम करे.

आरक्षण प्रक्रिया में बदलाव की मांग

अपने संबोधन में जीतनराम मांझी ने अनुसूचित जाति के भीतर आरक्षण के शैक्षणिक वर्गीकरण की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अनुसूचित जाति की विभिन्न उपजातियों को उनकी शिक्षा दर के आधार पर आरक्षण का लाभ मिले. सुप्रीम कोर्ट भी इस पर अपनी टिप्पणी दे चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस संबंध में आग्रह किया गया है.

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बिहार में सफाई कर्मचारी आयोग बनाने की मांग

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने बिहार सरकार से सफाई कर्मचारी आयोग के गठन की मांग की, ताकि इस वर्ग के रोजगार और जीवनस्तर में सुधार लाया जा सके. उन्होंने दलित छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति बढ़ाने और महिलाओं के लिए व्यावसायिक शिक्षा मुफ्त करने की भी वकालत की.

भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन देने की बात दोहराई

मांझी ने बिहार में भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन देने के अपने पुराने फैसले की याद दिलाते हुए कहा कि आज भी कई जगहों पर सिर्फ 3 डिसमिल जमीन दी जा रही है, जो न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने कहा कि बिना भूमि सर्वेक्षण का काम पूरा किए भूमिहीनों को उनका हक नहीं मिल पाएगा, इसलिए सरकार को भूमि सर्वेक्षण में तेजी लानी चाहिए.

युवाओं और महिलाओं से एकजुट होने की अपील

जीतनराम मांझी ने दलित युवाओं और महिलाओं से अपील की कि वे उपजातियों में बंटकर अपनी ताकत कमजोर न करें. उन्होंने कहा कि शिक्षा शेरनी का दूध है, जो इसे ग्रहण करेगा, वही ताकतवर बनेगा. दलित समाज का सशक्तिकरण तभी संभव है, जब युवा शिक्षा और जागरूकता के साथ आगे आएं और समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ें.
 

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