बिहार की राजधानी पटना में रविवार को महागठबंधन की महारैली हुई. इसके खत्म होने के बाद बीजेपी के राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने पीएम मोदी पर की गई राजद सुप्रीमो लालू यादव की टिप्पणी पर पलटवार किया. बाथे नरसंहार की दिलाई याद दिलाते हुए कहा कि लालू यादव ने जिस प्रकार से प्रधानमंत्री पर टिप्पणी की है, वो अक्षम्य है. वहीं, लालू यादव की टिप्पणी पर राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने भी पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि सिर मुंडवाना सभी हिंदुओं में सार्वभौमिक प्रथा नहीं है.
राज्यसभा सांसद भीम सिंह और बीजेपी प्रवक्ता जनकराम ने राहुल गांधी, लालू यादव और तेजश्वी यादव पर जमकर साधा निशाना. कहा कि जन विश्वास महारैली पूरी तरह से फेल हो गई है. गांधी मैदान में लालू सिर्फ तेजश्वी यादव का गुणगान कर रहे थे. मंच पर अपने भाषण के दौरन लालू यादव ने अपने बड़े बेटे को ही तवज्जो नहीं दी.
लालू यादव द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार और उनके हिंदू नहीं होने वाले बयान पर पलटवार करते हुए जनकराम ने कहा कि लालू प्रसाद यादव जिनके परिवार पर सवाल उठा रहे हैं, वो सूरज के सामने थूकने जैसी स्थिति है. वहीं, नरेंद्र मोदी के हिंदू न होने वाले लालू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि लालू यादव मंच पर अपने पूरे परिवार के साथ और अपने बेटियों के साथ मौजूद थे और अंगुली नरेंद्र मोदी के चरित्र पर उठा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि आरजेडी के नेता और कार्यकर्त्ता सिर्फ आरजेडी का झंडा उठाने के लिए बने हैं. उस पार्टी में पद सिर्फ लालू के परिवार को ही मिलेगा. आज रोहिणी और मीसा भारती को भी स्टेज पर बैठाकर रखा. जनता अब समझने लगी है कि कौन सी पार्टी परिवारवाद की है. जनता आने वाले चुनाव में लालू यादव को इसका जवाब देगी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी नेताओं ने कहा कि हिंदू समाज में बड़े बेटे को उत्तराधिकारी बनाया जाता है. लालू प्रसाद यादव ने उसे दरकिनार किया. हालत यह है कि लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने जब मंच पर उनके कान में कुछ कहा तब जाकर लालू ने तेजस्वी के साथ उनका भी हाथ थामा.
भीम सिंह ने कहा कि लालू प्रसाद यादव ने मंच से जनक को राम का पिता बताया. इस रैली को देखकर लालू बहुत अफसोस कर रहे होंगे. लालू 'भूरा बाल' के बारे में कहा करते थे. उसी बात को दूसरे तरीके से आज मंच से कहा गया. मंच से कुएं के पानी भरने वाली बातें कहकर 90 के दशक की याद दिला दी. उन्होंने आगे कहा कि वो बाथे नरसंहार को भूल गए. लालू को याद करना चाहिए था. रही बात इस रैली की तो भीड़ जुटाने के लिए रातभर नाच-गाना तक करवा गया.
पीएम मोदी पर लालू ने की ये टिप्पणी
महागठबंधन की रैली में लालू यादव ने कहा, 'मोदी कोई चीज हैं, क्या हैं. ये आजकल परिवारवाद पर हमला कर रहे हैं. कहते हैं कि लोग परिवार के लिए लड़ रहे हैं. आपके पास परिवार नहीं है. आपकी माता जी का जब देहांत हो गया तो हर हिंदू अपनी मां के शोक में दाल-बाढ़ी छिलवाता है, आप बताओ आपने क्यों नहीं छिलावाया? राम-रहीम के बंदों में, देश में नफरत फैला रहे हैं."
क्या है बाथे नरसंहार
दिसंबर, 1997 में लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार हुआ था. इसमें 58 दलितों की हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अमीर दास के नेतृत्व में एक आयोग बनाने की घोषणा की थी. इसका मकसद था नरसंहार के कारणों का पता लगाना.