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बिहार विधान परिषद से निष्कासित रामबली की याचिका पर SC ने सचिवालय से मांगा जवाब

आरजेडी नेता रामबली सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधान परिषद के सभापति सचिवालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. रामबली सिंह की इस याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट में 28 अक्टूबर को सुनवाई होगी. उन्होंने विधान मंडल से अनुमोदित राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक बयान देने के आरोप में निष्कासित किया गया था.

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सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आरजेडी नेता रामबली सिंह की याचिका पर बिहार विधान परिषद के सभापति सचिवालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. आरजेडी नेता ने अपनी याचिका में पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है.

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आरजेडी नेता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हुए मंगलवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने बिहार विधान परिषद के सभापति सचिवालय को नोटिस जारी किया है. और इस नोटिस के जवाब पर अब अदालत 25 अक्टूबर को सुनवाई करेगा.

दरअसल, रामबली सिंह को बिहार विधान परिषद के स्पीकर ने आदेश पारित कर अयोग्य घोषित करते हुए उनकी सदस्यता को रद्द कर दिया था. रामबली के खिलाफ शिकायत थी कि उन्होंने विधान मंडल से अनुमोदित राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक बयान दिए थे. इन्हीं आरोपों पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी. उस वक्त उनकी पार्टी राज्य सरकार का हिस्सा थी.

पटना HC ने वैध करार दिया था सभापति का फैसला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से पहले आरजेडी नेता ने बिहार विधान परिषद से अपनी सदस्यता रद्द के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था. पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के. विनोद चंद्रन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रामबली की याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए विधान परिषद के सभापति के फैसले को वैध करार दिया था. रामबली सिंह पर पार्टी विरोधी क्रियाकलापों एवं अनुशासन भंग करने का आरोप था.

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तत्कालीन सभापति देवेश चंद्र ठाकुर ने उन आरोपों को सही पाते हुए छह फरवरी को विधान परिषद से उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी. सभापति के आदेश के विरुद्ध उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. अब सभापति के आदेश और पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

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