बॉलीवुड के मशहूर गायक उदित नारायण झा की पहली पत्नी रंजना झा ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि उदित नारायण ने उन्हें घर से बेघर कर दिया और दूसरी पत्नी के साथ रह रहे हैं. रंजना झा ने सुपौल कुटुंब न्यायालय में वैवाहिक अधिकारों के रीस्टोरेशन के लिए केस किया है. रंजना झा ने उदित नारायण की दूसरी शादी पर सवाल उठाते हुए कहा, 'मैंने उदित नारायण झा से विवाह किया था और आज तक हमारा तलाक नहीं हुआ है. ऐसे में उनकी दूसरी पत्नी को कानूनी पत्नी मानना गलत होगा. जब मैं उनकी पहली पत्नी हूं और हमारा तलाक नहीं हुआ, तो दूसरी पत्नी कैसे हो सकती है? कानूनी रूप से वह पत्नी नहीं, बल्कि दूसरी औरत है, जिन्हें समाज में गलत तरीके से नाम दिया जाता है.
घर बेचकर बेघर करने का आरोप
रंजना झा ने उदित नारायण पर वादा खिलाफी का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, 'उदित नारायण ने 40 साल तक मेरे साथ रहने और मेरा साथ देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन जब मैं बीमार और लाचार हूं, तब उन्होंने मुझे बेघर कर दिया.' उन्होंने आगे बताया कि दो साल पहले जब उदित गांव आए थे, तब उन्होंने साथ रखने और मुंबई में फ्लैट खरीदने का वादा किया था. लेकिन बाद में उन्होंने जिस घर में मैं रह रही थी, उसे चुपके से बेच दिया और मुझे बेघर कर दिया. रंजना झा ने कहा कि मैं सिर्फ अपने पति के साथ रहना चाहती हूं.
रंजना झा ने कहा, 'उदित नारायण के पास पैसा और ताकत है, वह कोर्ट में लड़ सकते हैं, लेकिन मेरा क्या? मैं बीमार हूं, लाचार हूं, अकेली रह रही हूं. मैं सिर्फ अपने पति के साथ रहना चाहती हूं.
उदित नारायण पर 10 रुपये जुर्माना
रंजना झा ने सुपौल कुटुंब कोर्ट में मैरिटल रीस्टोरेशन के लिए मामला दायर किया है. उन्होंने कहा कि वह अक्सर बीमार रहती हैं और अपने पति के साथ रहना चाहती हैं, ताकि उनकी देखभाल हो सके. लेकिन उदित नारायण ने उनके साथ रहने से इनकार कर दिया है. न्यायालय ने उदित नारायण के अदालत में उपस्थित न होने पर 10 रुपये का अर्थदंड लगाया था और अगली सुनवाई 28 जनवरी 2025 को तय की थी. 28 जनवरी को भी उदित नारायण कोर्ट में पेश नहीं हुए थे. 21 फरवरी को सुपौल कोर्ट में उन्होंने पहली बार पेशी दी.
समझौते से इनकार, कानूनी लड़ाई जारी
कोर्ट में पेशी के बाद रंजना झा ने कहा, कोर्ट में उदित नारायण ने समझौते से इनकार कर दिया है और उन्होंने केस लड़ने की बात कही है. रंजना झा का कहना है कि शादी के बाद भी उन्हें पत्नी का दर्जा नहीं मिला और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा गया. उन्होंने न्यायालय से न्याय की उम्मीद जताई है.