बिहार में एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल की अटकलें लगने लगी हैं, जिसे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के एक बयान ने और हवा दे दी है. दरअसल, अमित शाह ने एक अखबार को हाल में दिए इंटरव्यू में जेडीयू और नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी की संभावना पर टिप्पणी की. उनसे पूछा गया था कि क्या नीतीश कुमार के लिए एनडीए के दरवाजे अब भी खुले हैं? इसके जवाब में गृहमंत्री शाह ने कहा- प्रस्ताव आएगा तो विचार करेंगे.
उनके इस बयान के बाद बिहार के सियासी हलके में जेडीयू और राजद के रिश्तों में कड़वाहट की चर्चाएं होने लगी हैं. इस बीच बिहार भाजपा नेता संजय सरावगी ने कहा है कि अगर नीतीश कुमार उनकी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करते हैं, तभी उनका स्वागत होगा. सरावगी ने कहा, 'नीतीश कुमार फिलहाल INDI गठबंधन में कांग्रेस, लालू और तेजस्वी के साथ हैं. INDI गठबंधन का कोइ भविष्य नहीं है. अगर नीतीश कुमार बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर पार्टी में आते हैं, तब उनके स्वागत के लिए हम तैयार हैं. INDI गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर आपस में मार काट मची हुई है'.
'नीतीश की छवि बेदाग है, उन्हें होना चाहिए इंडिया ब्लाॅक का फेस'
वहीं जेडीयू की ओर से भी प्रेशर पाॅलिटिक्स हो रही है. पार्टी का कहना है कि नीतीश कुमार बेदाग छवि वाले नेता हैं. उन्हें ही इंडिया ब्लाॅक का फेस होना चाहिए. जेडीयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री जमा खान ने कहा, 'इंडिया गठबंधन को लोकसभा 2024 का चुनाव नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ना चाहिए. क्योंकि हमारे नेता के ऊपर किसी भी प्रकार का दाग नहीं है. नीतीश कुमार सभी जाति-धर्म को साथ लेकर चलते हैं. अगर कोई हमारे नेता के ऊपर एक भी दाग लगा दे तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा. इससे अच्छी छवि का कोई और नेता नहीं हो सकता'.
नीतीश NDA में आ सकते हैं, वह लालू से परेशान हैं: उपेंद्र कुशवाहा
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, 'नीतीश कुमार एनडीए में आ सकते हैं. वह लालू से परेशान हैं. आरजेडी नीतीश को काफी परेशान कर रही है'. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा के आवास पर कल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों की बैठक हुई. वहीं नीतीश कुमार ने भी जेडीयू के सभी विधायकों और सांसदों से अगले आदेश तक पटना में मौजूद रहने के लिए कहा है.
बिहार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने X (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में अपने सभी विधायकों से 25 जनवरी तक पटना में ही रहने के लिए कहा है. बिहार में इस सियासी हलचल को देखते हुए अटकलें लग रही हैं कि 22 जनवरी (अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा) के बाद और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से पहले राज्य में कुछ बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है.