कोरोना के बाद की दुनिया काफी बदल गयी है और ऐसे में इस साल भारत का बजट भी काफी अलग हो सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तो अपने एक बयान में यह संकेत भी दिया है कि इस बार का बजट ऐतिहासिक होगा. आइए जानते हैं कि जानकारों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में किन चीजों पर फोकस हो सकता है. (फाइल फोटो: विक्रम शर्मा )
इकोनॉमी में सुधार होने लगा है, ऐसे में कंज्यूमर, कारोबारी और उद्योग जगत के लोग सभी बजट 2021 से बड़ी राहत और जरूरी कदमों की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि वे महामारी की चुनौतियों से निपट सकें और भविष्य में फलफूल सकें. (फाइल फोटो)
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार के बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ और स्किल्स पर फोकस हो सकता है ताकि इकोनॉमी में मांग बढ़े और नौकरियों का सृजन हो सके.
आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे के विकास और उत्पादक एसेट को मजबूत करने पर जोर दे सकती है. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुसार भारत बुनियादी ढांचे पर अपनी जीडीपी के 4 फीसदी तक खर्च करता है, जबकि चीन 6 फीसदी तक. (फाइल फोटो)
एक्सपर्ट का कहना है कि बुनियादी ढांचे पर निवेश से रोजगार सृजन, कम और अर्द्धकुशल लोगों की जीविका को बढ़ावा मिलता है तथा एमएसएमई के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग को बढ़ावा मिलता है. (फाइल फोटो)
इसी तरह जानकारों का यह मानना है कि भविष्य में कोरोना जैसी फिर किसी तरह की चुनौती से मुश्किल न आए, इसलिए सरकार को हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को मौजूदा जीडीपी के 3.5 फीसदी से बढ़ाकर कम से कम 5 फीसदी करना होगा. इस मामले में दुनिया का औसत 10 फीसदी है. (फाइल फोटो)
इसी तरह मांग और नौकरियों के सृजन को बढ़ावा देने के लिए बजट में उन संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए संसाधन मुहैया कराया जा सकता है जिनसे एमएसएमई की तरक्की बाधित हो रही है, जैसे कि कौशल विकास के अवसर, कौशल का उन्नयन, नौकरियों की बदलती प्रकृति के मुताबिक कामगारों को सशक्त बनाना. (फाइल फोटो)