वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) अगले सप्ताह मंगलवार को लोकसभा में बजट (Budget 2022) पेश करने वाली हैं. इससे पहले वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने एक बयान में कल बताया कि इस साल का बजट भी पेपरलेस (Paperless Budget) रहने वाला है. पहली बार 2021 में डिजिटल बजट (Digital Budget) पेश किया गया था. इससे पहले बजट की छपाई होती थी. इस बार बजट की तैयारी से पहले आयोजित की जाने वाली हलवा सेरेमनी (Halwa Ceremony) भी नहीं हुई. इस तरह मोदी सरकार (Modi Govt) के कार्यकाल में बजट से जुड़ी परंपराओं में किए गए बदलाव की लिस्ट में एक और काम जुड़ गया.
हलवा समारोह का काफी पुराना इतिहास है. इस समारोह के साथ ही बजट की छपाई का काम शुरू होता था. नॉर्थ ब्लॉक में हर साल बजट से पहले होने वाले इस समारोह में वित्त मंत्री समेत मंत्रालय के अधिकारी हिस्सा लेते थे. बजट की छपाई के काम में जो अधिकारी लगते थे, वे सभी इस समारोह के बाद अंडरग्राउंड हो जाते थे. बजट की गोपनीयता को बनाए रखने के लिए ऐसा किया जाता है. नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट से ये अधिकारी तभी बाहर निकलते हैं, जब संसद में बजट पेश हो जाता है. इससे पहले तक उन्हें अपने परिवार से भी संपर्क करने की सुविधा नहीं मिलती है. इस बार कोरोना महामारी की तीसरी लहर को देखते हुए हलवा सेरेमनी का आयोजन नहीं किया गया. अधिकारियों को हलवे की जगह मिठाइयां दी गईं.
जैसे इस बार का बजट हलवा सेरेमनी के समाप्त होने का साक्षी बना है, वैसे ही पिछले साल बजट की छपाई का काम बंद किया गया. साल 2021 में पहली बार डिजिटल बजट सामने आया. सरकार ने बजट प्रिंट करने के बजाय डिजिटल फॉर्मेट में इसे उपलब्ध कराया. यूनियन बजट की आधिकारिक वेबसाइट पर बजट के सारे डॉक्यूमेंट हिन्दी और अंग्रेजी में उपलब्ध कराए गए. इसके अलावा सरकार ने यूनियन बजट ऐप भी लॉन्च किया. इस बार भी बजट डिजिटल फॉर्मेट में ही रहने वाला है. कोई भी व्यक्ति संसद में पेश हो जाने के बाद वेबसाइट या ऐप से बजट को एक्सेस कर सकता है.
साल 2019 में बजट को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया. अंग्रेजों के जमाने से चमड़े के ब्रीफकेस में बजट पेश किए जाने की परंपरा चली आ रही थी. चुनाव के बाद जब निर्मला सीतारमण वित्त मंत्री बनीं और उन्होंने पहली बार बजट पेश किया तो यह परंपरा बदल गई. उन्होंने ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़ों में लिपटा बही-खाता चुना. यह एक तरह से अंग्रेजी परंपरा को बदलकर बजट को भारतीय टच देने जैसा रहा. तब से बजट बही-खाता के रूप में पेश होने लगा.
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अरुण जेटली वित्त मंत्री बने थे. उनके रहते हुए भी बजट में कई बड़े बदलाव हुए. पहले फरवरी महीने के आखिरी दिन बजट पेश होता था. 2017 में इसे बदल दिया गया. अब फरवरी महीने की पहली तारीख को बजट पेश होता है. इसी तरह पहले बजट शाम में पेश होता था, अब यह काम सुबह ही हो जाता है. मोदी सरकार के आने से पहले रेलवे के लिए अलग से बजट पेश किया जाता था. मोदी सरकार में यह परंपरा भी बदल गई और रेल बजट को आम बजट का हिस्सा बना दिया गया.