कोरोना संकट की वजह से यह मांग उठने लगी है कि टैक्सपेयर्स को सेक्शन 80D के तहत मिलने वाले टैक्स बेनिफिट को बढ़ाकर कम से कम 1 लाख रुपये तक के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर किया जाए. आइए जानते हैं कि अभी क्या हैं मेडिकल खर्चों के बदले टैक्स छूट के प्रावधान और क्यों हो रही इसे बढ़ाने की मांग?
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करेंगी. यह भी मांग की जा रही है कि मेडिकल रीइम्बर्समेंट के बदले स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया जाए. पहले कंपनियों से मिलने वाले मेडिकल रीइम्बर्समेंट पर ऐसा स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता था, लेकिन वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में जब एक कॉमन स्टैंडर्ड डिडक्शन दे दिया गया तो इसे खत्म कर दिया गया.
अभी कोई व्यक्ति अधिकतम 75 हजार रुपये तक के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भुगतान के बदले ही टैक्स छूट हासिल कर सकता है (सेल्फ, पति या पत्नी तथा बच्चों के लिए 25,000 और पैरेंट के लिए 50 हजार रुपये). तो वित्त मंत्री इस सीमा को तो बढ़ा ही सकती हैं, इसके अलावा कई और तरीकों से भी लोगों को राहत देने की कोशिश हो सकती है.
क्यों हो रही मांग
असल में कोरोना की वजह से इस साल बहुत से लोगों का हेल्थ पर खर्च काफी बढ़ गया है. जिन लोगों को कोरोना का इलाज कराना पड़ा उनसे तो निजी अस्पतालों ने 2 लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक के बिल वसूल लिए. लोगों को काफी परेशानी हुई है. इसलिए लोगों को लगता है कि हेल्थ इंश्योरेंस के बदले मिलने वाली टैक्स छूट की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर कम से कम 1 लाख रुपये तक करना चाहिए.
इसे देखें: आजतक LIVE TV
अभी कितनी मिलती है छूट
टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने बताया, 'अभी मेडिकल खर्चों पर दो तरह से टैक्स छूट मिलती है. पहला 80डी के तहत और दूसरा 80डीडीडी जैसी कुछ दूसरी धाराओं में. हालांकि मुख्य रूप से 80डी के प्रावधान का ही ज्यादातर लोग फायदा उठाते हैं.'
उन्होंने बताया कि आयकर की धारा 80डी के तहत किसी व्यक्ति द्वारा अपने, पति या पत्नी और बच्चों के हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के 25 हजार रुपये तक के भुगतान के बदले टैक्स छूट मिलती है. इसके अलावा पैरेंट्स के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर उसे 25 हजार से 50 हजार रुपये (यदि पैरेंट्स सीनियर सिटीजन हैं) तक के प्रीमियम के बदले टैक्स छूट मिलती है. यानी कोई व्यक्ति अभी अधिकतम 75 हजार रुपये तक के प्रीमियम पर ही टैक्स छूट हासिल कर सकता है.
इसके अलावा 80DD के तहत आपको डिसेबिलिटी के मामले में सेल्फ या खुद पर निर्भर परिवार के मेडिकल ट्रीटमेंट पर हुए खर्च के बदले टैक्स छूट मिलती है. 40 से 80 फीसदी डिसेबिलिटी के मामले में 75 हजार रुपये तक के खर्च के बदले टैक्स छूट मिलती है. इससे ज्यादा यानी बहुत गंभीर डिसेबिलिटी के मामले में 1.25 लाख रुपये तक के खर्च के बदले टैक्स छूट का फायदा मिलता है.
इसी तरह 80DDB के तहत कुछ निर्धारित गंभीर बीमारियों के इलाज पर होने वाले खर्च (सेल्फ या खुद पर निर्भर परिवार के लिए) 40,000 रुपये तक के खर्च को टैक्स फ्री माना जाता है. सीनियर सिटीजन पर ऐसे 1 लाख रुपये तक के खर्च को टैक्स मुक्त रखा जाता है.
बजट प्रावधान का खास फायदा नहीं होगा!
जानकारों का मानना है कि कोरोना की वजह से इस साल सरकार बजट में हेल्थ सेक्टर पर ज्यादा जोर देगी. लेकिन बलवंत जैन कहते हैं कि अगर सरकार टैक्स छूट का प्रावधान बढ़ाती है, तो उसका अभी तो टैक्सपेयर्स को कोई फायदा नहीं मिलने वाला क्योंकि यह व्यवस्था अगले वित्त वर्ष के लिए होगी और जो भी फायदा या नुकसान दिखेगा वह अगले वित्त वर्ष के अंत तक दिखेगा, जब उसका टैक्स का पूरे साल का हिसाब-किताब होगा.
कोविड के इलाज खर्च पर स्टैंडर्ड डिडक्शन मिले!
इसलिए यह हो सकता है कि सरकार हेल्थ सेक्टर में ऐसे प्रावधान लाने पर जोर दे जिनका फायदा लोगों को तत्काल मिल सके. बलवंत जैन कहते हैं कि सरकार को कोविड-19 के इलाज पर लोगों के खर्च के बदले स्टैंडर्ड डिडक्शन देना चाहिए. चूंकि लोग सैलरी घटने, नौकरी जाने से पहले से ही परेशान हैं. इसके अलावा इससे यह भी फायदा होगा कि सिर्फ पात्र लोगों को ही कर छूट का लाभ मिलेगा.