कोरोना से पस्त हो चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था को अब बजट से काफी उम्मीदें हैं. कोरोना संकट से भारतीय कॉरपोरेट जगत के कई सेक्टर को भारी नुकसान हुआ है. इसलिए अब कॉरपोरेट-इंडस्ट्री जगत पूरी उम्मीद कर रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार राहत के लिए कई कदम उठाएंगी.
सेक्टरवार उपायों के अलावा समूची इंडस्ट्री को राहत पहुंचाने वाले ऐलान की उम्मीद है.
जीएसटी में बदलाव
इंडस्ट्री चैम्बर्स का कहना है कि सरकार को जीएसटी को तर्कसंगत बनाना चाहिए. वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाते हुए सिर्फ तीन मानक रेट होने चाहिए और इसके रजिस्ट्रेशन को आसान बनाना चाहिए.
बैंकों का निजीकरण
इंडस्ट्री चैंबर सीआईआई और फिक्की पब्लिक सेक्टर बैंकों के निजीकरण की जमकर वकालत कर रहे हैं. सीआईआई का कहना है कि कुछ बड़े बैंकों को छोड़कर बाकी सभी पब्लिक सेक्टर के बैंकों में सरकार को अपनी हिस्सेदारी घटाकर 50 फीसदी से नीचे लानी चाहिए.
हेल्थ पर बढ़े खर्च
इंडस्ट्री चैंबर्स ने यह भी मांग की है कि कोरोना को देखते हुए सरकार इस साल अपने हेल्थ बजट में अच्छी बढ़ोतरी करे. फिक्की का कहना है कि सरकार को अगले पांच साल में हेल्थ पर जीडीपी के कम से कम आधा फीसदी का अतिरिक्त खर्च करना चाहिए. अभी सरकार हेल्थ पर जीडीपी का करीब 1.5 फीसदी खर्च करती है.
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रोजगार सृजन को बढ़ावा
इंडस्ट्री चैम्बर की यह मांग है कि रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बजट में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए. इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना चाहिए और इनकम टैक्स छूट की सीमा भी बढ़ानी चाहिए.
कॉरपोरेट टैक्स रेट
कॉरपोरेट टैक्स रेट में सरकार पिछले साल ही भारी कटौती कर चुकी है. इसलिए इसमें तो अब और कटौती की गुंजाइश नहीं है. जीडीपी में भारी गिरावट और इनकम टैक्स संग्रह न बढ़ने की वजह से ऐसा करना संभव ही नहीं है.
राजकोषीय घाटा भी बढ़ता जा रहा है ऐसे में सरकार के सामने कठिन चुनौती है कि किस तरह से राजकोष को भी मजबूत किया जाए और कॉरपोरेट को भी राहत मिले.
राहत के और क्या हो सकते हैं रास्ते
इंडस्ट्री चैम्बर्स का कहना है कि पिछले साल सरकार ने डिविडेंट टैक्स देने की जिम्मेदारी भी कंपनी से हटाकर शेयरधारकों पर कर दी थी. इसके साथ ही धारा 80 एम फिर से लाई जाए ताकि डिविडेंट टैक्स का कैस्केडिंग इफेक्ट कम हो. लेकिन नुकसान उठाने वाली कंपनियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. इसलिए इसमें संशोधन की मांग की जा रही है.
इसी तरह टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स (TCS) के प्रावधानों में कई बदलाव किये गये हैं, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों को लेकर स्पष्टता का अभाव है. इसको भी इस बजट में दूर करने की मांग की जा रही है.
कॉरपोरेट-इंडस्ट्री जगत की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-