scorecardresearch
 

बजट 2021: वित्त मंत्री से चर्चा में उद्योगपतियों की मांग- तेजी से हो सरकारी कंपनियों का विनिवेश 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट-पूर्व चर्चा में कंफडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (CII) के प्रतिनिधिनिमंडल ने मांग की है कि सरकारी कंपनियों का विनिवेश और मौद्रीकरण आक्रामक तरीके से किया जाए ताकि सरकारी राजस्व में इजाफा हो सके. इसके अलावा सीआईआई ने बैंकों में भी सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 50 फीसदी से नीचे लाने की मांग की है.

Advertisement
X
वित्त मंत्री ने उद्योगपतियों से की बजट-पूर्व चर्चा (फोटो: @FinMinIndia)
वित्त मंत्री ने उद्योगपतियों से की बजट-पूर्व चर्चा (फोटो: @FinMinIndia)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वित्त मंत्री की उद्यमियों के साथ बजट-पूर्व चर्चा
  • CII के प्रतिनिधिमंडल से वित्त मंत्री ने की बात
  • CII ने विनिवेश प्रक्रिया को तेज करने की मांग की है

कंफडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधिनिमंडल ने मांग की है कि सरकारी कंपनियों का विनिवेश और मौद्रीकरण आक्रामक तरीके से किया जाए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट की तैयारी के सिलसिले में सोमवार से उद्योग संगठनों और विशेषज्ञों के साथ बजट-पूर्व चर्चा के लिए बैठकें शुरू की. इस सिलसिले में आज पहली बैठक उद्योग चैंबर सीआईआई से जुड़े प्रमुख उद्योगपतियों के साथ हुई. यह बैठक वर्चुअली हुई है. 

Advertisement

इस दौरान कंफडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (CII) के प्रतिनिधिनिमंडल ने मांग की है कि सरकारी कंपनियों का विनिवेश और मौद्रीकरण आक्रामक तरीके से किया जाए ताकि सरकारी राजस्व में इजाफा हो सके. इसके अलावा सीआईआई ने बैंकों में भी सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 50 फीसदी से नीचे लाने की मांग की है. सीआईआई ने कहा कि सरकार के घटे कर राजस्व को देखते हुए यह जरूरी है.

क्या कहा CII ने 

CII ने कहा कि बजट प्रस्तावों का फोकस जीडीपी ग्रोथ के साथ ही राजकोषीय प्रबंधन पर होना चाहिए. CII के प्रेसिडेंट उदय कोटक ने कहा कि सरकार को अपने खर्चों के लिए बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के टिकाऊपन को प्राथमिकता देनी होगी. बजट को निजी निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए समर्थन मुहैया कराने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का समाधान करने वाला होना चाहिए. 

Advertisement

 इसे देखें: आजतक LIVE TV 

वित्तीय सुधार की तत्काल जरूरत 

सीआईआई ने वित्त मंत्री से कहा है कि सरकार को शेयर बाजार के रास्ते अगले 12 महीनों में सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 50 फीसदी से नीचे लाना चाहिए. सिर्फ तीन-चार बड़े बैंकों जैसे भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक को इस विनिवेश से मुक्त रखा जा सकता है. 

इसी तरह सरकार को अर्थव्यवस्था के प्रमुख सेक्टर को कर्ज मुहैया करने के लिए एक डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन्स (DFIs) की स्थापना करनी चाहिए. 

देश के शीर्ष उद्योगपतियों ने वित्त मंत्री को यह सुझाव दिया कि घाटे में चलने वाले या मुनाफे वाले सभी तरह के पीएसयू में सरकार को अपनी हिस्सेदारी बेचकर या अतिरिक्त जमीन को लीज पर देकर धन जुटाने की कोशिश करनी चाहिए. 

ये हैं अन्य प्रमुख मांगें 

  • वित्तीय जालसाजी के मामलों की जांच के लिए एक अलग खास तरह की एजेंसी बनायी जाए
  • वित्तीय जालसाजी का शुरुआती दौर में ही पता लगाने के लिए एक मार्केट इंटेलीजेंस यूनिट की स्थापना की जाए
  • अर्थव्यवस्था में मांग में तेजी लाने और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खर्च बढ़ाया जाए
  • हेल्थकेयर पर खर्च अगले तीन साल में बढ़ाकर जीडीपी का 3 फीसदी तक किया जाए
  • ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के बुनियादी ढांचा विकास पर खर्च बढ़ाया जाए
  • यह सुनिश्चित किया जाए कि ब्याज दरें मौजूदा स्तर पर ही लंबे समय तक बनी रहें 
  • स्थायी कर व्यवस्था का बने रहना सुनिश्चित हो 

ली जाती है सबकी राय 

Advertisement

बजट तैयार करने से पहले वित्त मंत्री देश के सभी प्रमुख सेक्टर के लोगों की राय लेती हैं. उद्योग चैंबर्स, किसान संगठन, विभिन्न तरह के कारोबार से जुड़े संगठन, कर्मचारी संगठन, राजनीतिक दल आदि सभी वित्त मंत्री के सामने अपनी सलाह रखते हैं. इस तरह सभी पक्षों की राय, प्रधानमंत्री, विभिन्न मंत्रालयों और मंत्रिमंडल की सलाह लेने के बाद वित्त मंत्री सालाना बजट तैयार करती हैं. 

 

Advertisement
Advertisement