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Budget 2023: मोदी सरकार ने अचानक लिया था ये फैसला... 92 साल पुराने नियम पर लगाया ब्रेक!

Budget 2023: देश का आम बजट पेश होने में महज छह दिन का समय शेष रह गया है. आगामी एक फरवरी 2023 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने कार्यकाल का लगातार पांचवां बजट भाषण संसद में देंगी. मोदी सरकार के लिए 2024 के आम चुनाव से पहले पेश होने वाला ये वजट बेहद खास है.

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नरेंद्र मोदी सरकार ने बदली रेल बजट से जुड़ी पुरानी परंपरा
नरेंद्र मोदी सरकार ने बदली रेल बजट से जुड़ी पुरानी परंपरा

देश का आम बजट (Budget 2023) पेश होने वाला है. पूरे देश की जनता टकटकी लगाए इसका इंतजार कर रही है. ये बजट पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए बेहद अहम है, क्योंकि ये मोदी सरकार का साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पेश होने वाला आखिरी पूर्ण बजट पेश है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) एक फरवरी 2023 को संसद में सुबह 11 बजे देश का वही-खाता जनता के सामने पेश करेंगी. 

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2017 से बदली रेल बजट की परंपरा
आम बजट में रक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ ही भारतीय रेलवे से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की जाएंगी. यहां बता दें मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में बजट से जुड़ी कई पुरानी परंपराओं में बदलाव किया है, जिसमें रेल बजट भी शामिल है. साल 2017 से पहले भारतीय रेलवे (Indian Railways) के लिए अलग से रेल बजट (Rail Budget) पेश किया जाता था.

आम बजट से पहले पेश होता था रेल बजट
देश के रेल बजट को अलग से पेश करने की परंपरा नई नहीं थी, बल्कि आजादी के पहले से चली आ रही थी. देश में रेल के लिए अलग बजट का सिलसिला साल 1924 से जारी था. इस आम बजट पेश होने के एक दिन पहले पेश किया जाता था, लेकिन जब केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आई तो Rail Budget की परंपरा को भी साल 2016 में बदलने का काम किया गया. नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के आम बजट में रेल बजट को मिलाकर पेश करने का ऐलान किया और 2017 से ये एक साथ पेश किया जाने लगा. 

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92 साल पुरानी परंपरा को बदला
नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Govt) ने 92 साल से चली आ रही इस परंपरा तो खत्म करते हुए आम बजट (Union Budget) और रेल बजट (Rail Budget) को एक साथ पेश करना शुरू कर दिया और अब तक ये कायम है. मोदी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jetaly) ने रेल बजट को आम बजट के साथ ही पेश करने का काम सबसे पहले किया था. 

नीति आयोग की सलाह पर अमल
नीति आयोग ने भी सरकार को दशकों पुराने इस चलन को खत्म करने की सलाह दी थी. काफी विचार-विमर्श और अलग-अलग अथॉरिटीज के साथ मंथन के बाद सरकार ने रेलवे बजट को आम बजट में मिलाने का सला किया. इसके बाद से ही ब्रिटिश शासन काल में 1924 से जारी रेल बजट से जुड़ी परंपरा बदल गई.


 

 

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