मोदी सरकार 3.0 के पहले बजट में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को 77,390.68 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. यह आंकड़ा 2023-2024 के बजट में घोषित रकम के मुकाबले महज 0.5 प्रतिशत अधिक है. दरअसल, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के लिए इस वित्त वर्ष के आवंटन का एक बड़ा हिस्सा जल जीवन मिशन (जेजेएम) की ओर निर्देशित है, जिसे 69,926.65 करोड़ रुपये मिले, जो 2023-2024 में 69,846.31 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से थोड़ा अधिक है.
इस प्रमुख कार्यक्रम का उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करना है, जिसमें नियमित और पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है. इसके अलावा, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान (एसपीएम-निवास) को 95 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले संशोधित अनुमान में मिले 3 करोड़ रुपये से बहुत अधिक है.
ओडीएफ के लिए 7182 करोड़
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जो खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति को बनाए रखने और ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ाने पर केंद्रित है, को 7,192 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. यह आवंटन पिछले वित्तीय वर्ष के बजट के अनुरूप है और राष्ट्रव्यापी स्वच्छता प्रयासों को समर्थन देना जारी रखता है. बजट में जलापूर्ति और स्वच्छता के लिए 64,302.85 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण वित्तपोषण भी शामिल है, जो पिछले वर्ष के 64,138.41 करोड़ रुपये से अधिक है.
सचिवालय के लिए 35.78 करोड़ आवंटित
आर्थिक सेवाओं के लिए बजट में सचिवालय के लिए 35.78 करोड़ रुपये और सामान्य आर्थिक सेवाओं पर पूंजीगत परिव्यय शामिल है. यह संशोधित बजट में 32.65 करोड़ रुपये से अधिक है, जो प्रशासनिक और अवसंरचनात्मक क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत देता है.
अतिरिक्त आवंटन में पूर्वोत्तर भारत के लिए 7,632.19 करोड़ रुपये शामिल हैं, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में जल और स्वच्छता सुविधाओं में सुधार करना है. राज्य सरकारों को अनुदान सहायता 5,169.86 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों को अनुदान 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
कितना खर्च करेगी सरकार?
केंद्र सरकार 2024-25 में 48 लाख 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च करेगी. अकेले 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे. रक्षा मंत्रालय को 6.21 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट दिया गया है. इसमें से हथियारों की खरीद पर 1.72 लाख करोड़ रुपये का खर्चा होगा. सरकार की सबसे ज्यादा कमाई इनकम टैक्स और जीएसटी से होगी. इनकम टैक्स से 19% और जीएसटी से 18% की आमदनी होगी. खर्च के लिए सरकार 27% पैसा उधार लेगी. वहीं, सबसे ज्यादा 21% पैसा राज्यों को टैक्स का हिस्सा देना और 16% केंद्र की योजनाओं पर खर्च होगा. जबकि, कर्ज पर ब्याज चुकाने में 19% रकम खर्च होगी.