नई टैक्स व्यवस्था में 7 लाख से 12 लाख रुपये तक की टैक्स छूट बढ़ाने और नए टैक्स स्लैब लागू करने से सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये टैक्सपेयर्स की जेब में छोड़ दिए हैं. इंडिया टुडे-बिजनेस टुडे बजट राउंड टेबल 2025 में राज्यसभा सांसद और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस कदम का स्वागत किया, लेकिन कहा कि जनता को और राहत देने की जरूरत थी. चिदंबरम बोले. 'यह अच्छा कदम है, लेकिन जनता के हाथ में सीधा पैसा आना चाहिए. इसके लिए जीएसटी घटाना चाहिए था या फिर पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करना चाहिए था.'
टैक्स छूट से ग्रोथ बढ़ेगी या नहीं?
सरकार को इस टैक्स कटौती से 1 लाख करोड़ रुपये का घाटा होगा, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे उपभोग और बचत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी. हालांकि, चिदंबरम इससे पूरी तरह सहमत नहीं दिखे. उन्होंने सवाल उठाया, 'सरकार ने टैक्सपेयर्स के हाथ में 1 लाख करोड़ रुपये दे दिए, लेकिन क्या यह पूरा पैसा खर्च होगा? कुछ लोग इसे बैंक में जमा करेंगे, कुछ लोन चुकाने में लगाएंगे, और कुछ विदेश यात्रा पर खर्च करेंगे. असली सवाल यह है कि इसमें से कितना पैसा घरेलू खपत को बढ़ाएगा?'
गरीबों के पास पैसा पहुंचाने की जरूरत
चिदंबरम ने आय असमानता का मुद्दा उठाते हुए बताया कि दिसंबर 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 4,122 रुपये और शहरी इलाकों में 6,996 रुपये है. उन्होंने कहा, "आबादी के निचले 50% लोगों के पास यह खर्च करने लायक पैसा भी नहीं है. अगर मांग बढ़ानी है तो सीधे जनता की जेब में पैसा देना होगा. जब आम आदमी ज्यादा खर्च करेगा, तभी बाजार में डिमांड बढ़ेगी."
कैपेक्स में कटौती पर सवाल
चिदंबरम ने सरकार की पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में कटौती पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा, 'केंद्र और राज्यों के पूंजीगत खर्च में 1.84 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है. ग्रामीण विकास मंत्रालय का बजट ही 72,000 करोड़ रुपये घटा दिया गया.'
अमेरिका की अनिश्चितता और विपक्ष से बातचीत की जरूरत
चिदंबरम ने अमेरिका में राजनीतिक हालात पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा, 'इस बार ग्लोबल माहौल में अनिश्चितता ज्यादा है, क्योंकि अमेरिका में अगला राष्ट्रपति कौन होगा, यह तय नहीं है. सरकार को विपक्षी नेताओं के साथ बंद कमरे में बातचीत करनी चाहिए. प्रधानमंत्री को अमेरिका दौरे से पहले आधा दर्जन विपक्षी नेताओं को बुलाकर गंभीर चर्चा करनी चाहिए.'