भारत सरकार के वित्त सचिव तुहिन कांत पांडे ने इंडिया टुडे-बिजनेस टुडे बजट राउंड टेबल में बजट 2025 के अहम प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की. बिजनेस टुडे के एडिटर सिद्धार्थ जराबी से बातचीत में उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स कटौती से उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी.
वित्त सचिव ने बताया कि सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये टैक्सपेयर्स को छोड़ने का फैसला किया है. इससे लोगों के पास अधिक पैसा बचेगा, जिसे वे विभिन्न क्षेत्रों में खर्च कर सकते हैं. उन्होंने कहा, अगर यह पैसा सरकार के पास रहता तो इसका निवेश कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहता, लेकिन जब यह आम जनता के पास रहेगा, तो यह फैशन, यात्रा, टेक्नोलॉजी, रेस्टोरेंट और अन्य क्षेत्रों में खर्च होगा. इसके अलावा, लोग बचत और निवेश भी कर सकते हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम मजबूत होगा और कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी.
कैपेक्स में बढ़ोतरी, लेकिन राजकोषीय घाटा नियंत्रण में
तुहिन कांत पांडे ने बताया कि सरकार ने 15.4 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) रखा है, जिसमें राज्य सरकारों को दिए गए अनुदान भी शामिल हैं. अगर 4.5 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश को भी जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा 19-20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है.
उन्होंने कहा, 'हमारा पूरा राजकोषीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) कैपेक्स पर जा रहा है, न कि राजस्व खर्च पर. यह अर्थव्यवस्था के लिए आदर्श स्थिति होती है, क्योंकि इससे लंबी अवधि में विकास को मजबूती मिलती है.'
GST स्लैब में बदलाव संभव
वित्त सचिव ने जीएसटी सुधारों को लेकर कहा कि GST दरों और स्लैब को तर्कसंगत बनाने (रेशनलाइजेशन) की जरूरत है. इसके लिए राज्यों और केंद्र सरकार के मंत्रियों का समूह (GoM) काम कर रहा है. उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में जीएसटी में कई सुधार किए गए हैं और आगे भी किए जाएंगे.
तुहिन कांत पांडे ने कहा, 'हमारे पास अब जीएसटी का पर्याप्त अनुभव है. हमने कई समस्याएं दूर की हैं और आगे भी सुधार जारी रहेंगे. मंत्रियों का समूह इस पर चर्चा कर रहा है और संतुलित फैसला लिया जाएगा.'
निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की अपील
तुहिन कांत पांडे ने निजी क्षेत्र से अधिक निवेश करने की अपील की और कहा कि उद्योग जगत को 'एनिमल स्पिरिट' (जोश और आत्मविश्वास) जगाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बजट में ऐसे कई उपाय किए गए हैं, जिससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, टेक्सटाइल, जहाज निर्माण, चमड़ा और खिलौना उद्योग जैसे क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मजबूत करने की योजना बनाई गई है.
वैश्विक मंदी और व्यापार बाधाओं को लेकर चिंता
वित्त सचिव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मंदी और व्यापार में आ रही रुकावटें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं. उन्होंने कहा कि रुपये में गिरावट और व्यापार संरक्षणवाद (प्रोटेक्शनिज्म) जैसी नीतियां वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचा सकती हैं. हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि भारत अपनी नीतियों के जरिए इससे निपटने में सक्षम होगा.