Budget Disinvestment Plan: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल भर पहले चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था. इस महत्वाकांक्षी टारगेट से मीलों पीछे छूट जाने के बाद सरकार ने इसमें संशोधन किया है. अगले वित्त वर्ष के लिए पेश हुए बजट में विनिवेश के टारगेट को आधे से भी कम कर दिया गया है. इस मोर्चे पर मिली असफलता ने Fiscal Deficit को लेकर भी सरकार की परेशानियां बढ़ा दी है.
55 फीसदी से ज्यादा घट गया टारगेट
वित्त मंत्री ने कल संसद में वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया. इसमें सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के टारगेट को घटाकर महज 78 हजार करोड़ रुपये कर दिया. अगले वित्त वर्ष के लिए तो विनिवेश के टारगेट को और कम रखा गया है. सरकार ने अप्रैल 2022 से मार्च 2023 के दौरान विनिवेश से 65 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है.
सरकार नहीं कर पाई इन कंपनियों का सौदा
चालू वित्त वर्ष के दौरान कई बड़े विनिवेश की योजनाएं थीं, लेकिन सरकार के प्रयास सफल नहीं हो पाए. आर्थिक समीक्षा के अनुसार, सरकार को चालू वित्त वर्ष में 24 जनवरी 2022 तक विनिवेश से सिर्फ 9,330 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं. इस साल बीपीसीएल, एअरइंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन, कंटेनर कॉरपोरेशन, आईडीबीआई बैंक, बीईएमएल जैसी सरकारी कंपनियों का विनिवेश करने की योजना थी. इनमें से सिर्फ एअरइंडिया का ही विनिवेश हो पाया है.
6 साल में सिर्फ 9 प्रयास सफल
सरकार ने 2016 में विनिवेश के लिए 36 कंपनियों का चयन किया था. इनमें से अभी तक मात्र 9 कंपनियों का ही विनिवेश हो पाया है. इन कंपनियों में एअरइंडिया, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन, एचएससीसी इंडिया, नेशनल प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन, ड्रेजिंग कॉरपोरेशन, टीएचडीसी इंडिया, नॉर्थ-ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन और कामराजर पोर्ट शामिल हैं. एअरइंडिया के लिए सरकार को कई साल के इंतजार के बाद पिछले साल सफलता मिल पाई.
एअरइंडिया सौदे को जनवरी 2022 के अंत में पूरा किया जा सका. इससे सरकार को 18 हजार करोड़ रुपये मिले. इस तरह अब तक विनिवेश से चालू वित्त वर्ष में सरकार 27,330 करोड़ रुपये जुटा पाई है. चालू वित्त वर्ष के संशोधित लक्ष्य को देखें तो अभी सरकार को करीब 48 हजार करोड़ रुपये और जुटाने हैं. इसके बाद अगले वित्त वर्ष में 65 हजार करोड़ रुपये जुटाने हैं. इस तरह अगले 14 महीने के दौरान 1.10 लाख करोड़ रुपये तक का विनिवेश करने का टारगेट है.
दो महीने में हो सकते हैं ये डील
सरकार इस साल मार्च तक एलआईसी का आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा मार्च 2022 तक पवन हंस का विनिवेश करने की योजना है. सरकार एक्सिस बैंक और आईटीसी में अपनी हिस्सेदारी बेचने का भी प्रयास कर रही है. पवन हंस से सरकार को कुछ हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं. आईटीसी में सरकार की हिस्सेदारी की मौजूदा वैल्यू करीब 21 हजार करोड़ रुपये है. इसी तरह एक्सिस बैंक की हिस्सेदारी से 3,700 करोड़ रुपये जुटाई जा सकती है. मतलब कि सरकार संशोधित लक्ष्य को पार करने में सफल हो सकती है.
अगले साल के लिए भी लंबी है लिस्ट
सरकार ने बीपीसीएल और आईडीबीआई बैंक का विनिवेश अब अगले वित्त वर्ष के लिए टाल दिया है. पिछले बजट में दो सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी का विनिवेश करने की बात की गई थी, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है. नीति आयोग ने दो सरकारी बैंकों इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का विनिवेश करने की सिफारिश की है. सरकार इससे पहले एक बीमा कंपनी को बेचना चाह रही है, लेकिन अभी नाम तय नहीं हो पाया है. मौजूदा वैल्यू के हिसाब से देखें तो आईडीबीआई बैंक से करीब 24,500 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की 93.08 फीसदी हिस्सेदारी से करीब 17,500 करोड़ रुपये, कंटेनर कॉरपोरेशन से करीब 12 हजार करोड़ रुपये, शिपिंग कॉरपोरेशन से करीब 4 हजार करोड़ रुपये, हिंदुस्तान जिंक से करीब 39 हजार करोड़ रुपये और इंडियन ओवरसीज बैंक की 96.38 फीसदी हिस्सेदारी से करीब 38 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं. इसके अलावा अन्य विनिवेश भी पाइपलाइन में हैं. अगर सरकार इन्हें अमलीजामा पहना पाई तो अगले साल का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है.