मालदीव को इस साल के केंद्रीय बजट में सबसे ज्यादा वृद्धि के साथ विकास सहायता मिली है. जबकि पिछले साल भारत और मालदीव के संबंधों में काफी तनाव रहा था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शनिवार को पेश किए गए बजट में मालदीव के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल के 470 करोड़ रुपये की तुलना में 28% अधिक है.
पिछले साल क्यों कम हुआ था बजट?
2024 में लोकसभा चुनाव के बाद मालदीव के लिए बजट घटाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था, जिसे बाद में संशोधित कर 470 करोड़ रुपये किया गया. ये कटौती तब हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के बाद मालदीव के कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. ऐसा माना गया कि पीएम मोदी की यात्रा का मकसद पर्यटकों को लक्षद्वीप की ओर आकर्षित करना था, जिससे मालदीव की टूरिज्म इंडस्ट्री प्रभावित हो सकती थी.
हालांकि मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के अक्टूबर 2024 में भारत दौरे के बाद संबंधों में सुधार आया. भारत-विरोधी अभियान के साथ मालदीव की सत्ता में आए मुइज्जू ने पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान स्वीकार किया कि भारत एक "महत्वपूर्ण साझेदार" है. इसके बाद भारत ने एक बार फिर मालदीव के लिए बजट बढ़ाया है.
भारत ने किन देशों को कितनी मदद दी?
भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत भूटान को सबसे ज्यादा 2,150 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है. इसके बाद नेपाल को 700 करोड़ रुपये, फिर मालदीव को 600 करोड़ रुपये और मॉरीशस को 500 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है. मॉरीशस का बजट पिछले साल के 576 करोड़ रुपये से घटाया गया है.
म्यांमार का बजट 400 करोड़ रुपये से घटाकर 350 करोड़ रुपये कर दिया गया, जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए सहायता राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया. अफ्रीकी देशों की सहायता 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 225 करोड़ रुपये कर दी गई.