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Budget 2025: वो बजट... जिसने बदल दी देश की आर्थिक दिशा और दशा, 34 साल पहले की बात!

बात साल 1991 की है, जब देश के पास बहुत कम पैसे बचे थे. यह पैसा इतना कम था कि ज्‍यादा समय तक देश चलाना संभव नहीं हो पाता. ऐसे में वित्त मनमोहन सिंह और तत्‍कालीन पीएम पीवी नरसिम्‍हा राव ने ऐसा फैसला लिया, जिसने देश की आर्थिक रफ्तार को बढ़ा दिया.

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

भारत में बजट से जुड़े कई दिलचस्‍प किस्‍से रहे हैं, जिन्‍हें हमेशा से याद किया जाता रहा है. ऐसा ही एक बजट मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने पेश किया था, जो इतिहास के पन्‍नों में दर्ज हो गया. हम आज उसी बजट के बारे में बता रहे हैं, जिसने देश की दशा और दिशा दोनों बदलकर रख दी थी. कहा यह भी जाता है कि अगर ये बजट पेश नहीं होता तो शायद आज अपने देश की हालत मौजूदा पाकिस्‍तान की जैसी भी हो सकती थी. 

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उस समय के तत्‍कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्‍हा राव ने ऐसा होने नहीं दिया और देश का 'युगांतकारी बजट' पेश कर दिया. आज भले ही हमारे बीच देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं हैं, लेकिन जब भी देश का बजट पेश होगा, तब-तब उन्‍हें 'गर्व और प्रेरणा' के तौर पर याद किया जाता रहेगा. 

बात साल 1991 की है, जब देश के पास बहुत कम पैसे बचे थे. यह पैसा इतना कम था कि ज्‍यादा समय तक देश चलाना संभव नहीं हो पाता. ऐसे में वित्त मनमोहन सिंह और तत्‍कालीन पीएम पीवी नरसिम्‍हा राव ने ऐसा फैसला लिया, जिसने देश की आर्थिक रफ्तार को बढ़ा दिया और कुछ ही साल में देश की आर्थ‍िक स्थिति इतनी अच्‍छी हो गई, जिसकी शायद बहुत से लोगों ने कल्‍पना भी नहीं की होगी. 

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बजट में क्‍या लिया था बड़ा फैसला? 
मनमोहन सिंह ने देश के लाइसेंसी राज को खत्‍म करते हुए आर्थिक उदारीकरण के युग की शुरुआत की थी. यह बजट ऐसे समय में पेश किया गया, जब देश आर्थिक पतन की ओर बढ़ रहा था. साथ ही इस बजट में निर्यात को लेकर भी कई कदम उठाए गए. सबसे बड़ा कदम सीमा शुल्‍क को 220 फीसदी से घटाकर 150 फीसदी कर दिया गया. ऐसे ही कुछ फैसले थे, जिसने भारत में विदेशी निवेशकों के आने के दरवाजे खोल दिए. फिर क्‍या था भारत का विदेशी मुद्रा तेजी से बढ़ने लगा.

क्‍यों कहा जाता है इसे युगांतकारी बजट 
इस बजट में विदेशी कंपनियों के आगमन की भी अनुमति दी गई थी और कई नियमों में बदलाव किया गया था. साथ ही बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए भी कई अहम कदम उठाए गए थे. इस कदम से देश से निर्यात करने वाले उत्‍पादों की संख्‍या में इजाफा हुआ. इससे सरकारी कोष भी भरने लगा और धीरे-धीरे करके देश विकास की ओर बढ़ने लगा. तत्‍कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह (FM Dr. Manmohan Singh) के इस बजट को 'युगांतकारी बजट' के नाम से जाना जाता है. 

निर्मला सीतारमण के नाम है ये रिकॉर्ड
गौरतलब है कि इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारणम लगातार 8वीं बाद देश का बजट पेश करने जा रही हैं. इतनी अधिक बार बजट पेश करने वाली ये देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं. इनके नाम पर एक और बड़ा रिकॉर्ड यह है कि साल 2020 में सबसे लंबा बजट भाषण 2 घंटे 42 मिनट का पढ़ा था.

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