जबसे New Tax Regime के तहत 12 लाख रुपये तक सालाना इनकम पर 0 टैक्स देनदारी और न्यू टैक्स स्लैब का ऐलान किया गया है, तबसे यह चर्चा तेज है कि सरकार Old Tax Regime को खत्म कर सकती है. हालांकि खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ओल्ड टैक्स रिजीम को लेकर सभी अटकलों को दूर करते हुए कहा है कि सरकार का ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म करने का कोई प्लान नहीं है.
बिजनेस टुडे के 'बजट राउंड टेबल' प्रोग्राम में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारे पास Old Tax Regime को क्लोज करने का अभी कोई प्रपोजल नहीं है. कोई भी टैक्सपेयर्स अपनी मर्जी के अनुसार दोनों में से किसी एक टैक्स रिजीम को चुन सकते हैं. यह टैक्सपेयर्स पर डिपेंड करता है कि वह कौन सा टैक्स व्यवस्था चुनता है.
क्या नई टैक्स व्यवस्था में सभी को शिफ्ट कराने का लक्ष्य?
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह चाहती हैं कि सभी टैक्सपेयर्स नई टैक्स व्यवस्था को अपना लें? निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए कहा कि मैं चाहती हूं कि देश का टैक्स स्ट्रक्चर आसान हो जाए और लोगों के ऊपर से टैक्स का बोझ कम हो. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि पुराने टैक्स कानून 1961 से संचालित है, जिसकी जगह पर सरकार नया टैक्स कानून लेकर आना चाहती है. इसके लिए कई संशोधन किए गए हैं.
टैक्सपेयर्स के 1 लाख करोड़ रुपये बचेंगे
उन्होंने बताया कि 12 लाख रुपये तक टैक्स छूट एक बड़ा कदम है. निर्मला ने कहा कि कैपिटेल एक्सपेंडेचर पर सरकार का फोकस बना हुआ है. लेकिन देश में लगातार इलेक्शन की वजह से इसमें थोड़ा ब्रेक लग जाता है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 12 लाख रुपये तक इनकम टैक्स छूट से टैक्सपेयर्स के करीब 1 लाख करोड़ रुपये बचेंगे. जो कि बड़ी राशि है और वो इस पैसे को सिस्टम में खर्च करेंगे, तो ग्रोथ को भी बल मिलेगा. वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे, रोडवेज, हाईवे, होम पर सरकार का फोकस बना हुआ है.
सरकार का लक्ष्य मिडिल क्लास को राहत देने का है
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब तक लोग पुरानी टैक्स व्यवस्था से छूट लेना चाहते हैं, तब तक इसे खत्म करने की उनकी कोई योजना नहीं है. वित्त मंत्री ने 1 फरवरी, 2025 को संसद में अपना बजट भाषण पेश करते हुए कहा कि मेरे प्रस्तावों का उद्देश्य मिडिल क्लास पर खास ध्यान देना है.
मिडिल क्लास को राहत देते हुए उन्होंने बजट भाषण में कहा था कि सरकार का लक्ष्य पर्सनल टैक्स में करेक्शन, कठिनाइयों को कम करने के लिए TDS/TCS को आसान बनाना, नियमों के बोझ को भी कम करना, व्यापार, रोजगार और निवेश को आसान बनाना है.