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दक्षिण के सुपरस्टार राजनीतिज्ञ हैं रेल मंत्री सदानंद गौड़ा

26 मई 2014 को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए रेलवे मंत्रालय का कार्यभार सौंपा.

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रेल मंत्री सदानंद गौड़ा
रेल मंत्री सदानंद गौड़ा

26 मई 2014 को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए रेलवे मंत्रालय का कार्यभार सौंपा. कर्नाटक के 20वें मुख्यमंत्री गौड़ा बैंगलोर नार्थ सीट से 16वीं लोकसभा के लिए चुने गए हैं. 2009 में हुए आम चुनावों में वो कर्नाटक के उड्डुपी चिकमंगलूर चुनाव क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए थे. सदानंद गौड़ा को बी एस येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद 4 अगस्त 2011 को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया गया था.

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राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान तब बनी थी जब उनके कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए 2008 में विधानसभा चुनावों में बीजेपी को दक्षिण भारत में किसी सीट पर जीत मिली. बीजेपी की केंद्रीय समिति के निर्देश पर 8 जुलाई 2012 को उन्होंने जगदीश शेट्टर के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया.

छात्र और राजनीतिक जीवन
19 मार्च 1953 को जन्में गौड़ा साइंस ग्रेजुएट हैं. पुत्तुर में स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्होंने उड्डुपी से लॉ की डिग्री भी हासिल की. छात्र राजनीति में गौड़ा बहुत सक्रिय रहे. वे लॉ कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन के महासचिव भी रहे. बाद में, वो एबीवीपी के जिला महासचिव भी चुने गए.

1976 में उन्होंने सुल्या और पुत्तर दोनों जगहों पर लॉ की प्रैक्टिस शुरू की. उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी में वो कुछ समय के लिए सरकारी वकील भी रहे लेकिन राजनीति में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने इससे इस्तीफा दे दिया.

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उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जन संघ से की. वो पार्टी की ओर से सुल्या विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष भी रहे. जनता पार्टी के विभाजन के बाद वो बीजेपी सदस्य बन गए. इसके बाद उन्होंने दक्षिण कन्नड़ बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष, दक्षिण कन्नड़ बीजेपी उपाध्यक्ष, राज्य बीजेपी युवा मोर्चा सचिव, राज्य बीजेपी सचिव और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव चुने गए.

विधानसभा और लोकसभा में गौड़ा
गौड़ा 1994 में पहली बार कर्नाटक विधानसभा के लिए चुने गए. अपने दूसरे कार्यकाल (1999) के दौरान वो विधानसभा में विपक्ष के उप नेता चुने गए. वो कर्नाटक इस दौरान वो विभिन्न समितियों के सदस्य भी रहे और 2003 में पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के अध्यक्ष बने.

2004 में वो वीरप्पा मोइली को हराकर पहली बार मैंगलोर सीट से लोकसभा पहुंचे. 2009 में पार्टी ने उन्हें उड्डुपी-चिकमगलुर सीट से उतारा. लोकसभा सदस्य के रूप में वो विज्ञान एवं तकनीक और वन एवं पर्यावरण समिति के सदस्य बने. चौदहवीं लोकसभा में वो वाणिज्य समिति के सदस्य रहे. केंद्र सरकार ने उन्हें 2005 में कॉफी बोर्ड का निदेशक नियुक्त किया. 2006 में गौड़ा को कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया.

मुख्यमंत्री के रूप में गौड़ा ने पार्टी की छवि मजबूत बनाने का काम किया जो भ्रष्टाचार की वजह से धूमिल पड़ गई थी. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने तय समयसीमा के भीतर सरकारी दफ्तरों में काम निपटाने पर जोर दिया. लेकिन गौड़ा बहुत दिनों तक इस पद पर नहीं बने रह सके क्योंकि वो येदियुरप्पा के हटने के बाद पार्टी के विभिन्न गुटों को एकजुट रखने में कामयाब नहीं हो सके. जुलाई 2012 में उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटने को कहा गया और उनकी जगह पर जगदीश शेट्टार को गद्दी सौंपी गई. हालांकि मई 2013 में विधानसभा चुनावों में हार के बाद सदानंद गौड़ा को बीजेपी ने फिर अपना नेता चुना और वो कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता बनाये गए.

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