अलग से रेल बजट (Rail Budget) पेश किए जाने की परंपरा को समाप्त हुए 6 साल हो चुके हैं. इससे पहले लोग यह जानने के लिए रेल बजट का बेसब्री से इंतजार करते थे कि इस बार कौन सी नई ट्रेनें (New Train) चलने वाली हैं और कहां नई रेलवे लाइन (Railway Line) बनने वाली है. अब इन सब बातों को लेकर संसद में ऐलान नहीं होता है, लेकिन हर साल सरकार कुछ नई ट्रेनें चलाती हैं. एक आंकड़े के अनुसार, मोदी सरकार (Modi Govt) ने पिछले 8 साल के दौरान करीब 800 नई ट्रेनों को पटरी पर उतारा है.
RTI में मिला ये जवाब
रेलवे ने एक आरटीआई (RTI) के जवाब में पिछले साल अक्टूबर में इसकी जानकारी दी थी. आरटीआई में पूछा गया था कि रेल बजट समाप्त होने यानी वित्त वर्ष 2016-17 के बाद कितनी नई ट्रेनें चलाई गई हैं. इसके जवाब में रेलवे ने बताया कि रेल बजट समाप्त होने के बाद 2016-17 में 223 नई ट्रेनें पटरी पर उतरीं. इसके बाद 2017-18 में 170 नई ट्रेनों का परिचालन शुरू हुआ. वित्त वर्ष 2018-19 में सबसे ज्यादा 266 नई ट्रेनें शुरू की गईं और इसके बाद 2019-20 में सरकार ने 144 नई ट्रेनें शुरू कीं.
जब कोरोना के चलते नहीं चली कोई नई ट्रेन
वित्त वर्ष 2020-21 में पहली बार कोई भी नई ट्रेन का परिचालन नहीं शुरू हुआ. यह कोरोना महामारी के चलते हुआ. कोरोना महामारी की पहली लहर के कारण मार्च 2020 में पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था. इस दौरान ट्रेनों के पहिए भी थम गए थे. आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब पूरे देश में ट्रेनों का परिचालन बंद हो गया था. इसके चलते कोई नई ट्रेन भी नहीं शुरू हो पाई थी.
इस बजट में नई ट्रेनों का आखिरी बार ऐलान
देश का आखिरी रेल बजट 2015 में पेश हुआ था. तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु (Suresh Prabhu) ने 2015-16 के लिए रेल बजट पेश किया था. इसके बाद 2016 से रेल बजट आम बजट का हिस्सा बना हुआ है. आखिरी रेल बजट में भी कोई नई ट्रेन शुरू करने का ऐलान नहीं हुआ था. बजट की यह परंपरा कांग्रेस सरकार के साथ ही समाप्त हो गई. यूपीए की सरकार के दौरान डीवी सदानंद गौड़ा (DV Sadanand Gauda) ने 2014 में रेल बजट पेश किया था, जिसमें आखिरी बार नई ट्रेनों का ऐलान हुआ था.
अलग बजट बंद होने से ऐसे प्रोजेक्ट भी लटके
रेल बजट समाप्त होने का एक और असर सिफारिश वाले नए प्रोजेक्ट पर भी हुआ है. अब सिफारिश से नई रेलवे लाइन बनाने का ऐलान तो हो जाता है, लेकिन ऐसे प्रोजेक्ट फंडिंग के लिए तरस जाते हैं. ऐसी कई नई रेलवे लाइन परियोजनाएं हैं, जिनके लिए आवंटन तो 500 से 1000 करोड़ रुपये तक हुए, लेकिन साल दर साल इन्हें महज 1-1 हजार रुपये दिए जाते रहे. इस तरह ऐसे प्रोजेक्ट बिना ऑफिशियली बंद किए दम तोड़ने के करीब हैं.