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Budget 2022: बजट में बदलाव के लिए याद किए जाते हैं ये 5 वित्त मंत्री, 160 साल पुराना है इतिहास

भारत का पहला बजट 1860 में पेश हुआ था. तब से अबतक के सफर में बजट से जुड़ी कई चीजें बदल चुकी हैं. आजाद होने के बाद पहली बार हिन्दी में प्रिंट होने से लेकर डिजिटल होने के बीच बजट का सफर बड़े बदलावों वाला रहा है. आइए जानते हैं कि उन 5 वित्त मंत्रियों के बारे में, जिन्होंने बजट में बड़े बदलाव किए...

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बजट में हुए हैं कई बड़े बदलाव
बजट में हुए हैं कई बड़े बदलाव

History of Union Budget: वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश होने में अब बस एक दिन बचा है. सोमवार को आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) के बाद मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) अपना चौथा बजट पेश करने वाली हैं. इस बार बजट के खास होने की उम्मीद की जा रही है और हर वर्ग के लोगों की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं. भारत में बजट का इतिहास 160 साल से भी ज्यादा पुराना है. इस दौरान बजट में कई बड़े बदलाव हो चुके हैं. बजट पेश किए जाने के दिन से लेकर समय तक को बदला जा चुका है. आइए जानते हैं उन 5 वित्त मंत्रियों के बारे में, जिन्होंने बजट में बड़े बदलाव किए.

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1860 में पेश हुआ पहला बजट, इनकम टैक्स की हुई शुरुआत

1857 की क्रांति से पहले भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) का शासन था, जिसे कंपनी राज कहा जाता है. इसके बाद ब्रिटिश क्राउन ने भारत की बागडोर अपने हाथों में ले ली. उस समय भारत आर्थिक संकटों से जूझ रहा था, जिस कारण ब्रिटिश सरकार ने नई योजनाएं तैयार की. भारत की अर्थव्यवस्था का लेखा-जोखा और आय-व्यय का हिसाब तय करने का काम दी इकोनॉमिस्ट (The Economist) अखबार शुरू करने वाले अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन (Economist James Wilson) को दिया गया. विल्सन ने 1860 में भारत का पहला बजट पेश किया. यहीं से भारत में इनकम टैक्स (Income Tax) की शुरुआत हुई.

इनके कार्यकाल में पहली बार पेश हुआ हिन्दी में बजट

भारत की आजादी के बाद RK Shanmukham Chetty पहले वित्त मंत्री बनाए गए. उन्होंने 26 नवंबर 1947 को आजाद भारत का पहला बजट पेश किया. वे 1 साल ही इस पद पर रहे. आजाद भारत के बजट में पहला बड़ा बदलाव तीसरे वित्त मंत्री CD Deshmukh के कार्यकाल में हुआ. देशमुख के कार्यकाल में ही भारत में पंचवर्षीय योजना (5 Year Plans) की शुरुआत हुई. उन्होंने जब 1951 में अपना पहला बजट पेश किया तो पहली बार इसके दस्तावेज हिन्दी में प्रिंट हुए. उससे पहले तक भारत का बजट सिर्फ अंग्रेजी में ही तैयार होता था.

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इंदिरा गांधी बजट पेश करने वाली पहली महिला

इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) जब प्रधानमंत्री थीं, तो करीब 1 साल के लिए वित्त मंत्रालय का प्रभार उनके ही पास था. उन्होंने 16 जुलाई 1969 से 27 जून 1970 तक वित्त मंत्रालय का प्रभार अपने पास रखा. इस दौरान उन्होंने 1970 का बजट खुद ही संसद में पेश किया. इस तरह इंदिरा गांधी के नाम भारत का बजट पेश करने वाली पहली महिला का रिकॉर्ड दर्ज है. उनके बाद भी करीब 5 दशक तक किसी अन्य महिला को यह सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ.

मनमोहन सिंह के इस बजट से बदली भारत की किस्मत

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के जिक्र के बिना बजट का इतिहास अधूरा रह जाता है. आजाद भारत के इतिहास में 1991 के बजट को मील का नायाब पत्थर माना जाता है. प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव (Narsimha Rao) के कार्यकाल में मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बनाए गए और उन्होंने ही भारत में आर्थिक उदारीकरण (Liberlization in India) की शुरुआत की. यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े बदलावों में से एक है. आज अगर भारत की गिनती दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में होती है, तो इसका सबसे ज्यादा श्रेय 1991 के ऐतिहासिक बजट को जाता है. मनमोहन सिंह ने इसके अलावा एक और बदलाव किया. उनसे पहले तक बजट भाषण का समापन Victor Hugo की पंक्तियों 'जिस विचार का समय आ गया हो, उसे दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती है' से किया जाता था. मनमोहन सिंह ने अपने भाषण का समापन Robert Frost की कविता से किया.

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वाजपेयी सरकार के इस वित्त मंत्री ने बदला बजट का समय

भारत में बजट की शुरुआत अंग्रेजों ने की. इस कारण बजट पेश किए जाने का समय लंदन की घड़ी के हिसाब से तय किया गया. भारत के बजट को ब्रिटेन की संसद में भी सुना जाता था, इस कारण इसे शाम में पेश किया जाता था. जब लंदन में दिन के 11 बजते हैं, तो भारत में शाम के 5 बज रहे होते हैं. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में जब यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) वित्त मंत्री बने तो उन्होंने यह परंपरा बदल दी. 27 फरवरी 1999 को उन्होंने पहली बार सुबह में भारत का बजट पेश किया. तब से बजट को सुबह ही पेश किया जाता है.

पहली महिला वित्त मंत्री ने किए बजट में कई बदलाव

निर्मला सीतारमण भारत की पहली महिला वित्त मंत्री हैं. इंदिरा गांधी के बाद वही दूसरी महिला हैं, जिन्हें बजट पेश करने का अवसर मिला है. इस बार वह अपना चौथा बजट पेश करने जा रही हैं. निर्मला सीतारमण का कार्यकाल बजट से जुड़ी परंपराओं को बदलने के लिए याद किया जाएगा. सबसे पहले उन्होंने 2019 में वित्त मंत्री बनते ही ब्रीफकेस में बजट पेश करने की परंपरा बदल दी. उसके बाद 2021 में जब उन्होंने तीसरा बजट पेश किया, तो प्रिंट करने की परंपरा समाप्त हो गई. इस बार भी वह डिजिटल बजट पेश करने वाली हैं. बजट की तैयारी से पहले होने वाले हलवा समारोह (Halwa Samaroh) की परंपरा भी इस बार बदल गई.

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