Budget Disinvestment Target: विनिवेश के मोर्चे पर सरकार को चालू वित्त वर्ष में बड़ा झटका लगा है. इससे सरकार ने बजट में विनिवेश के अपने लक्ष्य को घटा दिया है. पिछले बजट में 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य तय किया गया था, जिसे अब संशोधित कर 78 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए विनिवेश के टारगेट को और घटाकर 65 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है.
पिछले बजट के टारगेट से काफी दूर
पिछले साल बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश करने का लक्ष्य तय किया था. एक दिन पहले आई आर्थिक समीक्षा के अनुसार, सरकार चालू वित्त वर्ष में 1-1.30 लाख करोड़ रुपये तक जुटा सकती है. हालांकि यह बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या मार्च तक एलआईसी का आईपीओ आ जाएगा और अगर आ गया तो उसे किस तरह का रिस्पॉन्स मिला. अब बजट में सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए टारगेट को संशोधित कर 78 हजार करोड़ रुपये कर दिया है.
अगले वित्त वर्ष में इन कंपनियों का विनिवेश
पहले चालू वित्त वर्ष में बीपीसीएल और आईडीबीआई बैंक जैसी कुछ बड़ी सरकारी कंपनियों का विनिवेश करने का लक्ष्य रखा गया था. अब इन्हें अगले साल के लिए टाला जा चुका है. एलआईसी के प्रस्तावित आईपीओ को हटाकर देखें तो सरकार को मार्च 2022 तक विनिवेश से करीब 30 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं. सरकार को मार्च 2022 तक पवन हंस के विनिवेश से कुछ हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा सरकार एक्सिस बैंक और आईटीसी में कुछ हिस्सेदारी बेचना चाह रही है. आईटीसी की हिस्सेदारी बेचकर सरकार करीब 21 हजार करोड़ रुपये तक जुटा सकती है. इसी तरह एक्सिस बैंक की हिस्सेदारी से 3,700 करोड़ रुपये मिल सकते हैं.
ये कंपनियां भी विनिवेश की कतार में
अगले वित्त वर्ष में सरकार बीपीसीएल और आईडीबीआई बैंक के अलावा कुछ अन्य बड़े विनिवेश कर सकती है. इनमें कंटेनर कॉरपोरेशन, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान जिंक जैसी कंपनियां शामिल हो सकती हैं. आईडीबीआई बैंक में सरकार की 45.48 फीसदी हिस्सेदारी है. इसकी मौजूदा वैल्यू करीब 24,500 करोड़ रुपये है. इसी तरह कंटेनर कॉरपोरेशन की 30.8 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 12 हजार करोड़ रुपये है. सरकार को शिपिंग कॉरपोरेशन से करीब 4 हजार करोड़ रुपये और हिंदुस्तान जिंक से करीब 39 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं.
2 बैंकों और 1 बीमा कंपनी का भी विनिवेश प्लान में
अगले वित्त वर्ष में इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का विनिवेश भी देखने को मिल सकता है. नीति आयोग ने इसके लिए सिफारिश कर दी है. सरकार को इंडियन ओवरसीज बैंक की 96.38 फीसदी हिस्सेदारी से करीब 38 हजार करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है. इसी तरह सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की 93.08 फीसदी हिस्सेदारी से करीब 17,500 करोड़ रुपये हासिल हो सकते हैं. सरकार एक बीमा कंपनी के विनिवेश की भी योजना पर काम कर रही है.