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30 लाख करोड़ का होता है भारत का बजट, जानें कहां से आता है इतना पैसा

आम आदमी में मन सवाल रहता है कि सरकार जो बजट में बड़े-बड़े ऐलान करती हैं, उसके लिए पैसे कहां से आते हैं? सरकार के पास आमदनी का जरिया क्या है?

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सरकार की कहां से होती है कमाई?
सरकार की कहां से होती है कमाई?
स्टोरी हाइलाइट्स
  • टैक्स और राजस्व सरकारी आमदनी का सबसे बड़ा जरिया
  • लोककल्याण योजनाओं पर सरकार का सबसे ज्यादा खर्च
  • इस बार का बजट रहने वाला है 100 साल में सबसे अलग

हर किसी को बजट से उम्मीदें होती हैं. कोई टैक्स में छूट की उम्मीद करता है, तो कोई अन्य तरीके से मदद की आस करता है. दरअसल, 1 फरवरी 2021 को देश का आम बजट पेश होने वाला है. इस बार भी विभिन्न सेक्टर्स के लिए कई घोषणाएं रहेंगी. जिनपर एक तय धनराशि खर्च की जाएगी. 

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इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए भी बजट आवंटन होता है, जो वे पूरे वित्त वर्ष के दौरान विभिन्न खर्चों और योजनाओं में इस्तेमाल करते हैं. वित्त वर्ष 2020-21 में स्वीकृत बजट का आकार करीब 30 लाख करोड़ रुपये का था. आम आदमी में मन सवाल रहता है कि सरकार जो बजट में बड़े-बड़े ऐलान करती हैं, उसके लिए पैसे कहां से आते हैं? सरकार के पास आमदनी का जरिया क्या है?

आमतौर पर लोग जानते हैं कि टैक्स और राजस्व सरकार की आमदनी का सबसे बड़ा जरिया होता है. आइए बजट से पहले जानते हैं कि  सरकार की कमाई कहां-कहां से होती है? सबसे ज्यादा उधार और अन्य देयताएं से फंड मिलता है, उसके बाद जीएसटी और अन्य टैक्स से पैसा मिलता है. 

उदाहरण के लिए एक रुपये की आमदनी में मुख्यतौर पर सरकार के पास इन रास्तों से पैसे आते हैं:- 
उधार और अन्य देयताएं- 20 पैसे  
निगम कर- 18 पैसे 
इनकम टैक्स- 17 पैसे 
सीमा शुल्क- 4 पैसे
केंद्रीय उत्पाद शुल्क- 7 पैसे 
जीएसटी एंव अन्य कर- 18 पैसे 
विभिन्न राजस्व से कर- 10 पैसे 
कर्ज से इतर कैपिटल इनकम- 6 पैसे  (कुल 1 रुपये का हिसाब किताब है)

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सरकार की आमदनी का लेखा-जोखा
सरकार की कमाई का लेखा-जोखा

अब इसी रकम को सरकार बजट में लोककल्याण योजनाओं से लेकर दूसरे मदों पर खर्च करती है. अर्थशास्त्रियों की मदद से एक रूप-रेखा तैयार की जाती है, किस सेक्टर और किस मंत्रालय को कितने फंड की जरूरत है. आइए जानते हैं सरकार जमा राशि को कहां-कहां खर्च करती है. 

ब्याज अदायगी- 18 पैसे 
केन्द्रीय क्षेत्र की योजनाएं- 13 पैसे 
वित्त आयोग और अन्य अंतरण- 10 पैसे 
करों और शुल्कों में राज्यों का हिस्सा- 20 पैसे 
केन्द्रीय प्रायोजित योजनाएं- 9 पैसे 
आर्थिक सहायता- 6 पैसे 
रक्षा- 8 पैसे 
पेंशन- 6 पैसे 
अन्य व्यय- 10 पैसे (कुल 1 रुपये की आदमनी का हिसाब किताब है.)

हालांकि खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कह चुकी हैं कि कोरोना महामारी की वजह से इस बार का बजट पिछले 100 साल के बजट की तुलना में बिल्कुल अलग रहने वाला है, इसलिए बजट में आय-व्यय के जरिये में फेरबदल भी हो सकता है.

 

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