नया साल शुरू हो चुका है. ऐसे में अगर अभी से ही Tax Saving को लेकर कुछ तरीकों को फॉलो कर लिया जाए तो वित्तीय वर्ष के समाप्त होने तक आप लाखों रुपये तक का टैक्स बचा सकते हैं. नया फाइनेंशियल ईयर अप्रैल से शुरू होगा यानी कि अभी 3 महीने का वक्त बचा हुआ है, जिस दौरान टैक्सपेयर्स अपने टैक्स पेमेंट और देनदारी की समीक्षा करके टैक्स बचाने के तरीकों (Tax Saving Tips) के बारे में सोच सकते हैं. साथ ही टैक्सपेयर्स को अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के बारे में भी सोचना जरूरी है.
हालांकि टैक्स बचाने के तरीकों के बारे में उन लोगों को ज्यादा सोचाना चाहिए, जिनकी सालाना कमाई 7 लाख रुपये से ज्यादा है. अगर उनकी सैलरी 7 लाख रुपये से कम है तो वे न्यू टैक्स रिजीम का विकल्प चुनकर टैक्स देनदारी को खत्म कर सकते हैं. लेकिन अगर 7 लाख से ज्यादा सालाना इनकम है तो वे ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) का ऑप्शन चुनकर लाखों रुपये का टैक्स बचा सकते हैं. आइए जानते हैं आपको टैक्स बचाने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाने चाहिए?
पुरानी कर व्यवस्था बनाम नई कर व्यवस्था (Old vs New Tax Regime)
Tax Saving ऑप्शन की ओर आगे बढ़ने से पहले आपको अपने टैक्स स्ट्रक्चर को समझना जरूरी है और यह भी जान लेना चाहिए कि कहां आपको ज्यादा छूट मिलेगा? पुरानी कर व्यवस्था के तहत टैक्सपेयर्स के पास कई कैटेगरी में विभिन्न प्रकार की डिडक्शन और छूट का लाभ उठाने की क्षमता है. इस सिस्टम के तहत लगभग 70 कटौती और छूट की पेशकश की जाती है, जो टैक्स योग्य इनकम को कम करने में सहायता करती है. इसके अतिरिक्त, व्यक्ति धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं.
केंद्रीय बजट 2020 में रियायती टैक्स रेट्स की पेशकश करते हुए न्यू टैक्स रिजीम शुरू की गई थी. इस नई व्यवस्था को चुनने वाले टैक्सपेयर्स HRA, LTA, धारा 80C और अन्य जैसी प्रमुख कटौती का दावा करने के पात्र नहीं हैं. बजट 2023 में केंद्र सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को डिफ़ॉल्ट विकल्प के रूप में स्थापित किया. अगर कोई टैक्सपेयर्स पुरानी और नई कर व्यवस्था के बीच स्पष्ट रूप से चयन नहीं करता है, तो उसके टैक्स का कैलकुलेशन ऑटोमैटिक रूप से नई व्यवस्था के तहत की जाएगी.
टैक्स बचाने का पुराना तरीका
टैक्सपेयर्स के पास धारा 80C के तहत इनकम टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC), यूलिप (यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्रीमियम) और PPF(पब्लिक प्रोविडेंट फंड) जैसी चीजों में निवेश करने का विकल्प है. टैक्स छूट की उच्चतम सीमा 1.5 लाख रुपये है.
कैसे उठा सकते हैं टैक्स सेविंग का लाभ
धारा 80C: यह धारा व्यक्तियों को जीवन बीमा कंपनियों द्वारा प्रदान की गई नामित पेंशन योजनाओं में किए गए योगदान के लिए 1.5 लाख रुपये तक की सालाना कटौती का दावा करने की अनुमति देता है.
धारा 80CCD (1): टैक्सपेयर्स इस धारा के तहत अपने NPS अकाउंट में जमा राशि पर टैक्स् कटौती का लाभ उठा सकते हैं. एक वित्तीय वर्ष के लिए अधिकतम कटौती 1.5 लाख रुपये है.
धारा 80D: टैक्सपेयर्स आयकर अधिनियम, 1962 की धारा 80D के तहत स्वयं, जीवनसाथी, माता-पिता और आश्रित बच्चों के लिए चिकित्सा बीमा के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर कटौती का दावा कर सकते हैं. नियमित नागरिकों के लिए अधिकतम सीमा 25,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये सालाना है.
धारा 80सीसीडी (1बी): यह धारा एनपीएस में किए गए योगदान के लिए 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त कटौती की अनुमति देती है.
नई टैक्स व्यवस्था के तहत निवेश
नई कर व्यवस्था के तहत, सरकार ने हाल के वर्षों में कुछ बदलाव किए हैं जो वित्त वर्ष 2025 के लिए कर दाखिल करने में लागू होंगे. अब पूर्ण टैक्स छूट 7 लाख रुपये तक की आय पर लागू होगी, जबकि पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी. यह समायोजन सुनिश्चित करता है कि 7 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों को नई टैक्स व्यवस्था के तहत कोई टैक्स नहीं देना होगा. वहीं 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन नई कर व्यवस्था में भी उपलब्ध है. वित्त वर्ष 2024-25 से प्रभावी, यह कटौती केवल नई व्यवस्था के लिए 75,000 रुपये तक बढ़ा दी गई है.