सरकार ने एयर इंडिया की बिक्री के लिए योग्य कंपनियों से फाइनेंशियल बिड्स मंगानी शुरू की है. बोलियां जमा कराने के लिए 64 दिन का समय है उसके बाद निर्णय लेकर एयर इंडिया को निजी हाथों में सौंपने का काम शुरू हो जाएगा. यह एयर इंडिया के निजीकरण की प्रक्रिया के अंतिम चरणों में से एक है. इसलिए अब इस सौदे के सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है. अगली स्लाइड में जानें इससे पहले क्या हुआ एयर इंडिया के निजीकरण को लेकर...
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कर्ज के बोझ से लदी एयर इंडिया को खरीदने में टाटा समूह के साथ-साथ स्पाइसजेट के प्रमुख और अन्य कंपनी समूहों ने शुरुआती रुचि दिखाई थी. दिसंबर में टाटा समूह ने इसके लिए आरंभिक बोली भी पेश की थी. आगे जानें इनिशियल बिड्स मिलने के बाद क्या हुआ?
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पीटीआई की खबर के मुताबिक सरकार ने आरंभिक बिड्स का आकलन करने के बाद योग्य कंपनी या कंपनी समूह को एयर इंडिया के वर्चुअल डेटा रूम तक एक्सेस दिया. वर्चुअल डेटा रूम असल में एयर इंडिया के वित्तीय लेखा-जोखा, कर्ज का हिसाब-किताब और उसकी परिसंपत्ति इत्यादि सबकी जानकारी प्रदान करता है. कंपनियों को इस तक एक्सेस देने का मतलब है कि वह एयर इंडिया की पूरी जानकारी हासिल कर फिर अपनी बोलियां लगाएं या सवाल पूछें.
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वर्चुअल डेटा रूम के एक्सेस के बाद की प्रक्रियाओं में कंपनियों ने एयर इंडिया को लेकर सरकार से विभिन्न तरह के सवाल, अपनी शंकाओं को दूर किया. इसी के बाद सरकार ने कंपनियों ने फाइनेंशियल बिड्स मंगाई हैं. अगली स्लाइड में जानें कि सरकार ने इससे पहले क्या गलती की थी...
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सरकार ने 2017 में भी एयर इंडिया को बेचने की कोशिश की थी. लेकिन तब उसे सफलता नहीं मिली. इसलिए इस बार सरकार ने डील को आकर्षक बनाया और कंपनियों से कहा कि वे बताएं कि डील के साथ वह कंपनी के कितने प्रतिशत कर्ज की हिस्सेदारी लेंगी. 2017 की डील के समय बोली लगाने वाली कंपनी को एयर इंडिया के 60,074 करोड़ रुपये के कर्ज की पूरी जिम्मेदारी लेनी थी. अगली स्लाइड में जानें कि एयर इंडिया पाने वाली कंपनी को क्या-क्या मिलेगा...
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वर्ष 1932 से चल रही एयर इंडिया 2007 में इंडियन एयरलाइंस के साथ विलय होने के बाद से घाटे में है. अगर एयर इंडिया का निजीकरण होता है तो बोली जीतने वाली कंपनी को एयर इंडिया में सरकार की पूरी 100% हिस्सेदारी मिलेगी, साथ उसकी बजट एयरलाइंस एयर इंडिया एक्सप्रेस भी पूरी मिलेगी. इसी के साथ ग्राउंड हैंडलिंग का काम देखने वाली एआईएसएटीएस की 50% हिस्सेदारी भी मिलेगी. अगली स्लाइड में जानें कितने रूट हैं एयर इंडिया के पास...
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एयर इंडिया खरीदने वाली कंपनी को घरेलू हवाईअड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट मिलेंगे. इसके अलावा विदेशी एयरपोर्ट र 900 स्लॉट भी मिलेंगे. अगली स्लाइड में जानें कि एयर इंडिया को बचाने का क्या प्राइवेटाइजेशन ही एकमात्र रास्ता है?
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नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कुछ हफ्ते पहले कहा था कि जब तक एयर इंडिया का निजीकरण नहीं हो जाता, तब तक सरकार उसे चलाती रहेगी. लेकिन एयर इंडिया का या तो निजीकरण किया जा सकता है या उसे बंद करना होगा. उन्होंने कहा था कि अब जब एयर इंडिया थोड़ा कमाने लगी है तब भी पिछले कर्ज की वजह से हर दिन 20 करोड़ रुपये के नुकसान में है.
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