अनिल अंबानी ने ब्रिटेन की एक कोर्ट में कथित रूप से कहा कि उन्हें खर्च चलाने के लिए घर के गहने तक बेचने पड़े हैं. यह देखना आश्चर्यजनक और पीड़ादायी है कि कभी देश की दिग्गज कंपनी का बंटवारा कर बड़ी रकम और एसेट हासिल करने वाले अनिल अंबानी की आज यह हालत हो गई है. आइए जानते हैं कि कैसे अनिल अंबानी कर्जदार बनते गये और कैसे करीब 4 लाख करोड़ की उनकी कंपनियां आज करीब 2 हजार करोड़ रुपये की मार्केट कैप में सीमित हो गई हैं.
बंटवारे में अच्छा कारोबार मिला था: दिग्गज कारोबारी धीरूभाई अंबानी से रिलायंस का कारोबार मुकेश और अनिल अंबानी को विरासत में मिला था. हालांकि दोनों में बाद में जायदाद के बंटवारे को लेकर जमकर विवाद-तनाव रहा और आखिरकार मां कोकिला बेन और परिवार के कई अन्य करीबियों के दबाव में बंटवारा किया गया. मुकेश अंबानी को पुराना पेट्रोकेमिकल कारोबार मिला, तो अनिल अंबानी को नए जमाने का टेलीकॉम, फाइनेंशियल सर्विसेज और एनर्जी कारोबार.
नहीं कर पाये कमाल: लेकिन नए जमाने के कारोबार के साथ भी अनिल अंबानी कोई कमाल नहीं कर पाए, दूसरी तरफ मुकेश अंबानी लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं. अनिल अंबानी की टेलीकॉम कारोबार को लेकर काफी महत्वाकांक्षी योजना थी. वह टेलीकॉम, पावर और इन्फ्रास्ट्रक्चर में देश के सबसे बड़े खिलाड़ी बनना चाहते थे. लेकिन शायद इन्हीं कारोबार ने उन्हें बर्बाद कर दिया.
गलती पर गलती: साल 2002 में आरकॉम की शुरुआत पर एडीएजी ने कोड डिवीजन मल्टीपल एक्ससे यानी (सीडीएमए) टेक्नोलॉजी अपनाने का फैसला किया जो कि एक बेहद गलत निर्णय साबित हुआ. यह टेक्नोलॉजी 2जी और 3जी तक सीमित है. इसलिए जब 4जी और 5जी का जमाना आ गया आरकॉम मैदान से बाहर होना ही था. साल 2008 में जब आरकॉम को स्पेक्ट्रम मिला तब तक उसके ऊपर 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था.
फंसता गया निवेश: रिलायंस पावर ने साल 2008 में आईपीओ से रिकॉर्ड 11,563 करोड़ रुपये जुटाये थे. उसने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा-कुल 28,200 मेगावॉट क्षमता के 13 गैस, कोल और हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट का. लेकिन इन प्रोजेक्ट को गैस नहीं मिल पाई. बड़े भाई मुकेश अंबानी ने सस्ती दर पर गैस देने से मना कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने भी मुकेश के पक्ष में फैसला दिया. अनिल अंबानी को रिलायंस पावर के एसेट बेचने को मजबूर होना पड़ा. कंपनी का 1.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश फंस गया.
साल 2015 में डिफेंस सेक्टर में कदम रखते हुए अनिल अंबानी ने पिपावाव डिफेंस को खरीद लिया. इस कंपनी के ऊपर पहले से ही 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज था. आगे यह करीब 10,700 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान नहीं कर पायी. आईडीबीआई बैंक और आईएफसीआई ने इसे एनसीएलटी में घसीट लिया.
साल 2018 तक अनिल धीरूभाई अंबानी (ADAG) समूह की कंपनियों के पास 1.72 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था. करीब 46,000 करोड़ रुपये के कर्ज की वजह से ग्रुप की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस को बैंकरप्शी कोर्ट का सामना करना पड़ा. वित्त वर्ष 2010 के 27,710 करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 2020 तक RCom की आय घटकर 1,734 करोड़ रुपये रह गई.
यूपीए सरकार के दूसरे दौर के खत्म होने तक 2जी स्पेक्ट्रम के कथित घोटाले की वजह से 2 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट फंस गए. यह अनिल अंबानी समूह के लिए एक और झटका साबित हुआ. साल 2018 में अनिल अंबानी ने एजीएम में घोषित कर दिया कि वे टेलीकॉम सेक्टर से बाहर जा रहे हैं.
भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में कई बैंकों ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इन्फ्राटेल को करीब 1,200 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा था. इसके लिए अनिल अंबानी ने पर्सनल गारंटी दी थी. नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ने अनिल अंबानी के खिलाफ आदेश देते हुए दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दे दिया है.
अपने शीर्ष समय में साल 2008 में अनिल अंबानी के रिलायंस समूह (ADAG) की कंपनियों की मार्केट वैल्यू करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन अब उनकी सभी कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू करीब 2 हजार करोड़ रुपये ही रह गई है.
आज रिलायंस कैपिटल की बाजार पूंजी सिर्फ 202 करोड़ रुपये, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का मार्केट कैप 606 करोड़ रुपये, आरकॉम का मार्केट कैप 247 करोड़ रुपये, रिलायंस पावर का मार्केट कैप 794 करोड़ रुपये, रिलायंस होम फाइनेंस का शेयर 86.25 करोड़ रुपये, रिलायंस नवल ऐंड इंजीनियरिंग का मार्केट कैप सिर्फ 217 करोड़ रुपये है.