पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी की आशंका के बाद भी सोने की कीमतों में गिरावट जारी है. आम तौर पर मंदी, युद्ध आदि जैसे संकट आने पर सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं. अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से सोने में गिरावट आ रही है. इस कारण गुरुवार को सोने की वैश्विक कीमतें कम होकर एक साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई.
अमेरिका में एक दिन पहले महंगाई के आंकड़े जारी हुए हैं. अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट ने बुधवार को महंगाई के आंकड़े जारी किए. आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में महंगाई की दर 9.1 फीसदी रही, जो साल 1981 के बाद सबसे ज्यादा है. इससे पहले मई महीने में अमेरिका की महंगाई दर 8.6 फीसदी थी. वैसे तो अमेरिका में महंगाई दर के और बढ़ने के अनुमान पहले से लगाए जा रहे थे, लेकिन इतनी तेजी की किसी को आशंका नहीं थी. मार्केट को लग रहा था कि जून महीने में महंगाई दर बढ़कर 8.8 फीसदी पर पहुंच सकती है. (Photo: Reuters)
फेडरल रिजर्व पहले ही इस महीने ब्याज दर 0.75 फीसदी बढ़ाने के संकेत दे चुका है. अमेरिका में 1980 के दशक के बाद अब सबसे तेजी से ब्याज दरें बढ़ाई जा रही हैं. दरअसल दशकों की सबसे ज्यादा महंगाई ने फेडरल रिजर्व के पास इसके अलावा और कोई उपाय नहीं छोड़ा है. इससे पहले फेडरल रिजर्व ने जून महीने में ब्याज दर को 0.75 फीसदी बढ़ाया था. वह पिछले 28 साल के बाद एक बार में ब्याज दर में की गई सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी. (Photo: Reuters)
ब्याज दर बढ़ने की आशंका से भी सोने की कीमतें कम हो रही हैं. इन कारणों से हाजिर बाजार में सोने का भाव आज 0.4 फीसदी गिरकर 1.728.39 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं अमेरिका में गोल्ड फ्यूचर की कीमत 0.5 फीसदी कम होकर 1,726.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. यह करीब एक साल में सोने का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले पिछले साल अगस्त महीने में सोने की वैश्विक कीमतें इतनी कम हुई थीं. पिछले साल 08 अगस्त को सोने का भाव गिरकर 1,718.35 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था.
अमेरिकी डॉलर में पिछले कुछ समय से लगातार तेजी आ रही है. डॉलर 20 साल के सबसे उच्च स्तर पर पहुंचने के करीब है. वहीं अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड 10 साल में सबसे ज्यादा है. इस कारण निवेशकों के सामने सुरक्षित निवेश के बेहतर रिटर्न वाले उपाय उपलब्ध हैं. सोने की कीमतों में गिरावट का सबसे बड़ा कारण यही है. फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ोतरी इसमें और योगदान दे रही है.
सरकार ने हाल ही में सोने के आयात पर बेसिक इम्पोर्ट ड्यूटी (Basic Import Duty) को बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया है. इससे पहले इसकी दर 7.5 फीसदी थी. भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को ज्यादातर सोना आयात करना पड़ता है. कच्चा तेल के बाद सोना भारत के इम्पोर्ट बिल (Import Bill) के सबसे बड़े कंपोनेंट में से एक है. सरकार ने शुल्क कम करने का फैसला सोने की डिमांड कम करने के लिए था. हालांकि ग्लोबल मार्केट में भाव कम होने से भारत में भी सोना सस्ता हो सकता है. (Photo: Reuters)
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) के अनुसार, पिछले साल भारत में सोने की डिमांड में तेजी देखने को मिली थी. महामारी के दौरान भले ही इसकी डिमांड कम हुई थी, लेकिन बाद में लोग सोने की खरीदारी बढ़ाने लग गए थे. भारत में वैसे ही सोने को न सिर्फ निवेश और बचत का माध्यम माना जाता है, बल्कि इसके पारंपरिक महत्व भी हैं. लोग त्योहारों पर भी सोने की खरीदारी करते हैं. इसके अलावा शादी के सीजन में खासकर ग्रामीण भारत में सोने की डिमांड शिखर पर पहुंच जाती है. साल 2021 के आंकड़ों को देखें तो भारत का सोना आयात (Gold Import) एक दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गया था.