लॉकडाउन के दौरान खादी कारीगरों की आजीविका पर बहुत बुरा असर पड़ा था. लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' की अपील ने खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्रों में एक नई जान डाल दी है. देश के बड़े हिस्से में खादी के कपड़े, मास्क और अन्य सामान की धूम मची हुई है.
दरअसल कोरोना संकट के बीच इस त्योहारी सीजन में खादी उत्पादों की रिकॉर्ड बिक्री का आंकड़ा सामने आया है. इस साल दो अक्टूबर के बाद से केवल 40 दिनों में ही दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी इंडिया के प्रमुख आउटलेट पर खादी की एक-दिन की बिक्री का आंकड़ा चौथी बार एक करोड़ रुपये की सीमा पार कर गया है.
13 नवंबर को इस आउटलेट की कुल बिक्री 1.11 करोड़ रुपये रही, जो इस साल किसी एक दिन में सबसे बड़ी बिक्री का आंकड़ा है. खादी की बिक्री का आंकड़ा इस साल गांधी जयंती (दो अक्टूबर) को 1.02 करोड़ रुपये और 24 अक्टूबर को 1.05 करोड़ रुपये और सात नवंबर को 1.06 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
इससे पहले 2018 में, एक दिन की बिक्री ने चार मौकों पर एक करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया था. खादी की एक दिन में अब तक की सबसे बड़ी बिक्री 1.27 करोड़ रुपये दर्ज की गई है जो 02 अक्टूबर, 2019 के दिन हासिल हुई थी.
गौरतलब है कि 2016 से पहले खादी की एक दिन की बिक्री कभी भी एक करोड़ रुपये के पार नहीं गई थी. 22 अक्टूबर, 2016 को कनॉट प्लेस स्थित खादी इंडिया के आउटलेट पर एक दिन की बिक्री का आंकड़ा पहली बार एक करोड़ रुपए के पार गया था, यह 116.13 लाख रुपये था.
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना का कहना है कि महामारी के बावजूद, खादी कारीगरों ने उत्पादन गतिविधियों को पूरे जोश के साथ जारी रखा और साथी देशवासियों ने भी उसी उत्साह के साथ उनका समर्थन किया. सक्सेना ने कहा कि आर्थिक मंदी के बावजूद, केवीआईसी ने खादी के विकास की गति को बनाए रखने में कामयाबी हासिल की है.
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्योहार के इस वक्त में लोगों से लोकल सामान खरीदने की अपील की है. मन की बात में भी पीएम मोदी ने कहा था कि खादी अब दुनिया में अपनी एक पहचान बना रही है, साथ ही ये फैशन स्टेटमेंट भी बन चुकी है. पीएम मोदी ने इस दौरान खादी मास्क की तारीफ की और बताया कि किस तरह दिल्ली के खादी इंडिया स्टोर पर बिक्री बढ़ने लगी है.