लक्ष्मी विलास बैंक पर बैन
बीते मंगलवार को केंद्रीय रिजर्व बैंक ने निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने तक के लिए पाबंदी लगा दी है. इस पाबंदी के बाद अब बैंक के खाताधारक ज्यादा से ज्यादा 25,000 रुपये तक की निकासी कर सकेंगे. मतलब ये कि लक्ष्मी विलास बैंक एक महीने तक रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना बचत, चालू या किसी तरह के जमा खाते से किसी जमाकर्ता को कुल मिलाकर 25,000 रुपये से अधिक का भुगतान नहीं करेगा.
21 हजार करोड़ से ज्यादा डिपॉजिट
लेकिन क्या आपको पता है कि लक्ष्मी विलास बैंक में 21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम डिपॉजिट है. अहम बात ये है कि इस डिपॉजिट रकम में अधिकतर राशि ग्राहकों की है. करीब 94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 के वार्षिक नतीजों में इसकी जानकारी दी थी.
लगातार कम हो रहा डिपॉजिट
हालांकि, डिपॉजिट की ये रकम बीते दो वित्त वर्ष के मुकाबले कम है. वित्त वर्ष 2017-18 में लक्ष्मी विलास बैंक का डिपॉजिट 33 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा था तो वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में ये रकम घटकर 29 हजार करोड़ के करीब आ गई थी.
अलग-अलग राज्यों में 566 ब्रांच
इसके मुताबिक लक्ष्मी विलास बैंक की अलग-अलग राज्यों में 566 ब्रांच, 973 ATM मशीनें हैं. वहीं, कर्मचारियों की संख्या 4,349 है. बैंक के निवेश की बात करें तो 5 हजार 384 करोड़ रुपये है. कुल इनकम 2,558 करोड़ रुपये है तो वहीं नेट लॉस 836 करोड़ रुपये से ज्यादा का है. लक्ष्मी विलास बैंक का रिजर्व या सरप्लस 89,309 लाख रुपये है.
कब शुरू हुई समस्या
बैंक की समस्या तब शुरू हुई जब उसने एसएमई (लघु एवं मझोले उद्यम) के बजाए बड़ी कंपनियों पर ध्यान देना शुरू किया. बैंक ने फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रवर्तक मलविन्दर सिंह और शिविन्दर सिंह की निवेश इकाई को 720 करोड़ रुपये का कर्ज दिया.
आरबीआई ने की थी कार्रवाई
यह कर्ज 2016 के अंत और 2017 की शुरुआत में 794 करोड़ रुपये की मियादी जमा पर दिया गया. यहीं से बैंक की समस्या शुरू हुई. इसके बाद बैंक का घाटा बढ़ने लगा. वहीं, आरबीआई ने सितंबर 2019 में एनपीए बढ़ने के साथ बैंक को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के अंतर्गत रखा.
बोर्ड के सात सदस्यों को कर दिया गया बर्खास्त
बीते सितंबर महीने में बैंक का संकट तब बढ़ गया जब शेयरधारकों ने बोर्ड के सात सदस्यों को बर्खास्त कर दिया था. ऐसे में अस्थिरता को देखते हुए रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) के दैनिक कामकाज को देखने के लिये निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति (सीओडी) का गठन किया. इसमें तीन स्वतंत्र निदेशक मीता मखान, शक्ति सिन्हा और सतीश कुमारा कालरा को रखा गया.