पड़ोसी देश श्रीलंका (Sri Lanka Crisis) इन दिनों आजादी के बाद के सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है. शानदार बीचेज और पर्यटन स्थलों के लिए लोकप्रिय यह छोटा देश अभी इस कदम आर्थिक संकट में फंसा है कि कभी भी दिवालिया होने का खतरा सिर पर है. विदेशी मुद्रा भंडार के लगभग समाप्त हो जाने से शुरू हुआ यह संकट अब राजनीतिक और सामाजिक संकट का रूप ले चुका है. सरकार में शामिल कई प्रभावशाली लोग एक के बाद एक पद छोड़ रहे हैं. दूसरी ओर जरूरी चीजों के भाव आसमान पर पहुंच जाने से आम लोगों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है. (Photo: Reuters)
न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका में आर्थिक और राजनीति संकट के बीच फलों और सब्जियों के भाव काफी चढ़ गए हैं. रिपोर्ट में एक फल दुकानदार फार्रुख के हवाले से बताया गया है कि 3-4 महीने पहले जो सेब 500 रुपये किलो बिक रहा था, वह अभी 1000 रुपये किलो पर पहुंच चुका है. इसी तरह नाशपाती की कीमत पहले के 700 रुपये किलो की तुलना में 2 गुना से भी ज्यादा बढ़कर 1500 रुपये किलो हो चुकी है. दुकानदार ने ये भी बताया कि लोगों के पास पैसा ही नहीं बचा है. (Photo: Reuters)
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने दूसरी ओर बताया है कि महज एक दिन पहले श्रीलंका के नए वित्त मंत्री बनाए गए अली साबरी ने भी इस्तीफा दे दिया है. साबरी से पहले श्रीलंका के प्रेसीडेंट गोटाबाया राजपक्षे के छोटे भाई बासिल राजपक्षे वित्त मंत्रालय संभाल रहे थे. आर्थिक हालात खराब होने के बाद राजपक्षे सरकार के ऊपर जनता का प्रेशर बढ़ गया है. इसी कारण पहले बचाव करने के बाद भी प्रेसीडेंट को अपने छोटे भाई से वित्त मंत्रालय लेना पड़ गया था. इसके बाद श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने अहम पॉलिसी अनाउंसमेंट से पहले पद छोड़ दिया था. कुछ ही रोज पहले राजपक्षे सरकार में खेल मंत्रालय संभाल रहे प्रेसीडेंट के भतीजे को भी हटाना पड़ गया था. (Photo: Reuters)
फलों और सब्जियों के अलावा अन्य जरूरी चीजों का भी श्रीलंका में ऐसा ही हाल है. कुछ ही दिन पहले खबर आई थी कि चीनी की कीमत 290 रुपये किलो तो चावल की कीमत 500 रुपये किलो हो चुकी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अभी श्रीलंका में महंगाई की दर 17 फीसदी को भी पार कर चुकी है. यह पूरे दक्षिण एशिया के किसी भी देश में महंगाई का सबसे भयानक स्तर है. इसके चलते श्रीलंका के सामने आजादी के बाद का सबसे गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. अभी इस छोटे देश की स्थिति ऐसी है कि 1 कप चाय के लिए लोगों को 100 रुपये देने पड़ रहे हैं. इतना ही नहीं, ब्रेड और दूध जैसी जरूरी चीजों के दाम भी आसमान पर हैं. खबरों के अनुसार, अभी श्रीलंका में ब्रेड के एक पैकेट की कीमत 150 रुपये हो चुकी है. दूध का पाउडर 1,975 रुपये किलो हो चुका है, तो एलपीजी सिलेंडर का दाम 4,119 रुपये है. इसी तरह पेट्रोल 254 रुपये लीटर और डीजल 176 रुपये लीटर बिक रहा है. (Photo: Reuters)
श्रीलंकाई करेंसी और इकोनॉमी की इस बदहाली का कारण भारी-भरकम कर्ज है. श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) समाप्त होने की कगार पर है. महज तीन साल पहले श्रीलंका के पास 7.5 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जब वहां नई सरकार का गठन हुआ था. इसमें तेजी से गिरावट आई और जुलाई 2021 में यह महज 2.8 बिलियन डॉलर रह गया था. पिछले साल नवंबर तक यह और गिरकर 1.58 बिलियन डॉलर के स्तर पर आ चुका था. श्रीलंका के पास विदेशी कर्ज की किस्तें चुकाने लायक भी फॉरेक्स रिजर्व नहीं बचा है. आईएमएफ ने हाल ही में कहा है कि श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था दिवालिया होने की कगार पर है. विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से श्रीलंकाई रुपये की वैल्यू (Sri Lankan Rupee Value) भी कम हो रही है. (Photo: Reuters)