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बिज़नेस न्यूज़

ट्रंप जीतें या बाइडेन, भारत को क्या? जानें-क्या होगा व्यापारिक रिश्तों पर असर?

अमेरिकी चुनाव में बहुत कांटे की लड़ाई
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अमेरिकी चुनाव में बहुत कांटे की लड़ाई दिख रही है. अमेरिका में अगला राष्ट्रपति कौन बन रहा है? इसे भारतीय भी काफी उत्सुकता से देख रहे हैं, क्योंकि इससे भारत-अमेरिका के बीच कारोबार, सैन्य और कूटनीतिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है. 

 व्यापार और आर्थिक मामले में अभी कई उलझनें हैं
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हालांकि ज्यादातर जानकार यह मानते हैं कि राष्ट्रपति कोई भी बने रिश्तों पर खास असर नहीं पड़ने वाला है. दोनों देशों के बीच सैन्य रिश्ते तो अच्छे हो गये हैं और कई समझौते भी हुए हैं, लेकिन व्यापार और आर्थिक मामले में अभी कई उलझनें हैं.  दोनों देश एक बड़ा ट्रेड डील करने की कोशिश में लगे हैंं, लेकिन अभी इसमें अभी कुछ खास प्रगति नहीं हो पाई है. 

बाइडेन जीते तो भारत से रिश्तों पर ज्यादा असर नहीं
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ऐसा लगता नहीं कि बाइडेन राष्ट्रपति चुनाव जीत गये तो भारत से रिश्तों पर ज्यादा असर होगा, क्योंकि उनकी नीतियों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है. अगर ट्रंप अमेरिका फर्स्ट जैसी संरक्षणवादी नीतियों की बात करते हैं, तो बाइडेन भी बाय अमेरिकन का नारा देकर ऐसी नीतियों के प्रति झुकाव रखते हैं. यही  नहीं बाइडेन के नेतृत्व में अमेरिका व्यापारिक समझौतों में पर्यावरण और श्रम कानूनों के अनुपालन पर ज्यादा जोर दे सकता है. (फोटो: AP) 

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आंकड़े बता रहे कहानी
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आंकड़े तो यहां तक बताते हैं कि पिछले करीब 30 साल में भारतीय माल पर औसत कर रिपब्लिकन प्रेसिडेंट के दौर में कम (3.16%)  रहा है, जबकि डेमोक्रेट राष्ट्रपति के दौर में यह थोड़ा ज्यादा (3.37%) रहा है, जिसके कि बाइडेन कैंडिडेट हैं. 

ट्रंप लगातार भारत की टैरिफ नीतियों की आलोचना करते रहे हैं
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दूसरी तरफ, ट्रंप लगातार भारत की टैरिफ नीतियों की आलोचना करते रहे हैं और भारत को टैरिफ किंग कहते रहे हैं. इसी वजह से दोनों देशों के बीच लिमिटेड ट्रेड डील ही हो पायी है. यानी चुनाव कोई भी जीते अमेरिका फर्स्ट की नीति जारी रहेगी. यहां गौर करने वाली बात यह है कि भारत में भी 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पर जोर बढ़ रहा है. (फोटो: AP) 

निर्यात में बड़ा हिस्सा जेम्स एवं ज्वैलरी का होता है
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भारत द्वारा अमेरिका में होने वाले बड़े निर्यात में जेम्स एवं ज्वैलरी (कुल अमेरिकी निर्यात का 17%), कपड़ा एवं रेडीमेड गारमेंट (15%), दवाएं और फार्मा उत्पाद (13%), कृषि, समुद्री एवं संबंधित उत्पाद (9%) मशीनरी एवं इक्विपमेंट (10%), इलेक्ट्रिक मशीनरी (5%), इलेक्ट्रॉनिक्स (4%) शामिल हैं. 

अमेरिका से कच्चा तेल आयात बड़ी मात्रा में होता है
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दूसरी तरफ, भारत में अमेरिका से होने वाले प्रमुख आयात में पेट्रोलियम एवं कच्चा तेल (19%), केमिकल (10%), कृषि, फल एवं अन्य संंबंधित उत्पाद (5%), विमान एवं उसके पार्ट्स (5%), इलेक्ट्रिक मशीनरी (7%), इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स (8%), जेम्स एवं ज्वैलरी (12%) आदि शामिल हैं. 

द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा
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भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2000 के 12 अरब डॉलर के मुकाबले वित्त वर्ष 2020 में बढ़कर 89 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. इस दौरान भारत से अमेरिका को​ निर्यात 8 अरब डॉलर से बढ़कर 53 अरब डॉलर और भारत में अमेरिका से आयात 3.5 अरब डॉलर से बढ़कर 35 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. 

कपड़ा निर्यात के लिए अमेरिका शीर्ष गंतव्य
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भारत के कपड़ा निर्यात के लिए अमेरिका अब भी शीर्ष गंतव्य बना हुआ है. लेकिन हाल में जीएसपी बेनिफिट खत्म करने का नुकसान यह हुआ है कि भारत को अब बांग्लादेश, पाकिस्तान, वियतनाम के मुकाबले वहां ज्यादा ट्रेड बैरियर का सामना करना पड़ता है. 
 

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फार्मा जैसे कई क्षेत्र में पारस्परिक हितों के टकराव
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इसलिए यह देखना होगा कि नए राष्ट्रपति के कार्यकाल में क्या बड़ी ट्रेड डील पर दस्तखत हो पाता है? फार्मा, डेटा सिक्योरिटी, कृषि, डेयरी जैसे कई क्षेत्र में पारस्परिक हितों के टकराव की वजह से अमेरिका के साथ पूर्णत: मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भी होना मुश्किल है. 

मेडिकल डिवाइस जैसे नए क्षेत्रों में दोनों देश सहयोग बढ़ा सकते हैं
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लेकिन कोविड-19 के बाद और चीन से ट्रेड वार के बदले हुए हालात में अब अमेरिका की तरफ से भारत को ज्यादा रियायतों की उम्मीद की जा सकती है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ग्रीन टेक्नोलॉजी, डिजिटल, मेडिकल डिवाइस जैसे नए क्षेत्रों में दोनों देश सहयोग बढ़ा सकते हैं. 

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