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बिज़नेस न्यूज़

भारत-US रिश्ते को नए आयाम देंगे बाइडेन, 7 साल पहले दे दिए थे संकेत

Joe Biden plans for india
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करीब दो दशक पहले भारत और अमेरिका के संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरपूर रहा है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रिश्ते और बेहतर हुए हैं. अब अमेरिका में सत्ता परिवर्तन हुआ है. डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के रिश्ते को और प्रगाढ़ किया है. अब देखना है कि बाइडेन क्या रवैया अपनाते हैं?

भारत-अमेरिका के बीच दोस्ती
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लेकिन इतना तय है कि जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद भी भारत-अमेरिका के बीच दोस्ती का सिलसिला थमने वाला नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते उस मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां से पीछे नहीं लौटा जा सकता. जो बाइडेन की कोशिश होगी कि यहां से भारत-अमेरिका के रिश्ते को एक नया आयाम दिया जाए. 

 भारत को लेकर रुख सकारात्मक
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जो बाइडेन का ट्रैक रिकॉर्ड कहता है कि उनका भारत को लेकर रुख सकारात्मक रहा है, खासकर बाइडेन भारतीय बाजार को लेकर वाकिफ हैं. 77 साल के अनुभवी जो बाइडेन मानते हैं कि दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत, और द्विपक्षीय व्यापार में बहुत गुंजाइश है. इसके अलावा जो बाइडेन की टीम में कई भारतीय हैं जो रिश्तों को नई मंजिल तक ले जाना चाहेंगे. 

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भारत और अमेरिका के बीच कारोबार
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फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच 150 बिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक का सालाना कारोबार है. लेकिन जब बाइडेन वर्ष 2013 में बतौर उप राष्ट्रपति भारत यात्रा पर आए थे तब उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा था. अब उम्मीद की जा रही है कि जो बाइडेन इस लक्ष्य तक ले जाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेंगे.

कमला हैरिस अमेरिका की नई उप-राष्ट्रपति
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वहीं कमला हैरिस अमेरिका की नई उप-राष्ट्रपति चुनी गई हैं, जिनका भारत से गहरा नाता है. अब कमला हैरिस के जरिये दोनों देश कारोबार समेत दूसरे मोर्चे पर एक-दूसरे से करीब आएंगे. यही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की एक टिप्पणी का जो बाइडेन ने जोरदार विरोध किया था. जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर ट्रंप ने कहा था कि भारत प्रदूषित हवा से लड़ने को तैयार नहीं है. 

जब ट्रंप का बाइडेन ने किया विरोध
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भारत को अपना दोस्त बताने के बाद भी ट्रंप एच-1बी, एच-2बी समेत अन्य विदेशी वीजा पर अंकुश लगाने वाले फैसले करते रहे. दोस्ती के बीच ट्रंप लगातार भारत को टैरिफ किंग कहते रहे. वहीं फार्मा, डेटा सिक्योरिटी, कृषि, डेयरी जैसे कई क्षेत्र में पारस्परिक हितों के टकराव की वजह से अमेरिका और भारत के बीच पूर्णत: मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नहीं हो पाया है. अब इसमें बेहतरी की उम्मीद की जा रही है. जो बाइडेन एक करोड़ से ज्यादा अप्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता देने वाले हैं. जिसमें करीब 5 लाख भारतीय होंगे. 

चीन अमेरिका के लिए मुसीबत
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वैसे इस पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों सहमत हैं कि चीन विश्व व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है. अमेरिका चीन के मामले में जो नीति अपनाएगा, उसका असर भारत पर भी पड़ेगा. जो बाइडेन को भी पता है कि चीन से मुकाबले से भारत के साथ रिश्ते को और प्रगाढ़ करना होगा.
 

ओबाम के दौर में भी बेहतर रिश्ते
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इससे पहले बराक ओबामा ने राष्‍ट्रपति रहते हुए द्विपक्षीय संबंधों और आतंकवाद को रोकने वाले कदमों की बात कर संबंधों को मजबूत किया. उच्‍च तकनीकी उपकरणों के निर्यात संबंधी पाबंदी हटाई और दोनों देशों की रक्षा कंपनियों के बीच कारोबार को सुगम बनाया. वर्ष 2015 में ओबामा पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में भारत दौरे पर आए. गणतंत्र दिवस की परेड में बतौर मुख्‍य अतिथि बनने वाले वो पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति थे.

व्यापार बढ़ाने पर फोकस
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भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2000 के 12 अरब डॉलर के मुकाबले वित्त वर्ष 2020 में बढ़कर 89 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. इस दौरान भारत से अमेरिका को​ निर्यात 8 अरब डॉलर से बढ़कर 53 अरब डॉलर और भारत में अमेरिका से आयात 3.5 अरब डॉलर से बढ़कर 35 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. 

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कपड़ों का व्यापार
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बता दें, भारत द्वारा अमेरिका में होने वाले बड़े निर्यात में जेम्स एवं ज्वैलरी (कुल अमेरिकी निर्यात का 17%), कपड़ा एवं रेडिमेड गारमेंट (15%), दवाएं और फार्मा उत्पाद (13%), कृषि, समुद्री एवं संबंधित उत्पाद (9%) मशीनरी एवं इक्विपमेंट (10%), इलेक्ट्रिक मशीनरी (5%), इलेक्ट्रॉनिक्स (4%) शामिल हैं. 

पीएम मोदी के दौर में रिश्ते और बेहतर
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दूसरी तरफ, भारत में अमेरिका से होने वाले प्रमुख आयात में पेट्रोलियम एवं कच्चा तेल (19%), केमिकल (10%), कृषि, फल एवं अन्य संंबंधित उत्पाद (5%), विमान एवं उसके पार्ट्स (5%), इलेक्ट्रिक मशीनरी (7%), इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स (8%), जेम्स एवं ज्वैलरी (12%) आदि शामिल हैं. 

कई समझौते ट्रंप के दौर में
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हालांकि ट्रंप के दौर में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट (वर्ष 2016), भारत-अमेरिका सामरिक ऊर्जा भागीदारी (वर्ष 2017 में घोषित), संचार, संगतता और सुरक्षा समझौता (वर्ष 2018), आतंकवाद विरोध पर द्विपक्षीय संयुक्त कार्यदल की बैठक (पिछली बैठक मार्च 2019) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता हुआ. 

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