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बिज़नेस न्यूज़

120 कमरे, 11 रेस्त्रां, रोज का किराया 25 लाख! देखें लग्जरी होटल में तब्दील चर्चिल के वॉर ऑफिस की तस्वीरें

चर्चिल का वार ऑफिस बना लग्जरी होटल
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दूसरे विश्व युद्ध (Second World War) के दौरान ब्रिटेन में जिस इमारत को तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल (Winston Churchill) ने अपना वार ऑफिस बनाया था, वो पुरानी इमारत अब एक आलीशान लग्जरी होटल में तब्दील हो चुकी है. इस ओडब्ल्यूओ बिल्डिंग (OWO Building) को बनाए गए रैफल्स लंदन होटल (Raffles London Hotel) का औपचारिक उद्घाटन कर दिया गया है. इसे हिंदुजा ग्रुप द्वारा अधिग्रहित कर राजमहल सरीखे होटल में बदला गया है. उद्घाटन के मौके पर हिंदुजा समूह के को-चेयरमैन जी पी हिंदुजा (GP Hinduja) भी मौजूद रहे. 
 

ब्रिटिश प्रिंसेस एन ने किया उद्घाटन
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ब्रिटिश प्रिंसेस एन ने किया उद्घाटन
वर्ल्ड वार ऑफिस की जगह पर बने रैफल्स लंदन (Raffles London) का उद्घाटन ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय की बहन राजकुमारी ऐन (Princess Anne) के हाथों हुआ. इस समारोह में ब्रिटिश राजघराने के सदस्यों के अलावा UK के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत कई पॉलिटिकल हस्तियां भी शामिल हुईं. इस दौरान हॉस्पिटैलिटी से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक की तमाम हस्तियां भी मौजूद रहीं. गौरतलब है कि करीब 8 साल पहले हिंदुजा ग्रुप ने इस युद्धकालीन इमारत का अधिग्रहण किया था, जिसमें 120 कमरे हैं. ये इमारत ब्रिटेन में डाउनिंग स्ट्रीट के ठीक सामने व्हाइटहॉल पर बनी है, जहां से विंस्टन चर्चिल ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन का नेतृत्व किया था. 
 

OWO बिल्डिंग बनाने पर आया था इतना खर्च
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OWO बिल्डिंग बनाने पर आया था इतना खर्च 
Hinduja Group की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 1906 में उस समय के बड़े ब्रिटिश आर्किटेक्ट विलियम यंग (Willion Young) द्वारा इस इमारत को बनाया गया था. उस समय इस 5,80,000 वर्ग फुट के विशाल एरिया में फैली इमारत को बनाने पर 1.2 मिलियन पाउंड का खर्च आया था और ये इमारत इतनी मजबूत है कि युद्ध के दौरान इस पर अक्टूबर 1940 में एक के बाद एक सात बड़े बम गिराए गए थे और इसके बावजूद इसमें मामूली नुकसान ही हुआ था. 
 

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350 मिलियन पाउंड में हुआ था अधिग्रहण!
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350 मिलियन पाउंड में हुआ था अधिग्रहण!
अब इस पुरानी इमारत को नया रंग-रूप देकर एक आलीशान होटल के तौर पर विकसित किया गया है. पीटीआई के मुताबिक, इसे हिंदुजा ग्रुप और फ्रांसीसी होटल कंपनी एकॉर ने मिलकर बनाया है. साल 2014 में इसे बेचने के लिए बोली प्रक्रिया शुरू की गई थी और उस समय इसके 100 मिलियन पाउंड में बिकने की उम्मीद जताई जा रही थी. लेकिन हिंदुजा ग्रुप की ओर से OHL Desarrollos के साथ मिलकर सबसे बड़ी बोली लगाई और इसे खरीद लिया. रिपोर्ट की मानें तो दोनों साझेदारों ने इस इमारत के अधिग्रहण के लिए 350 मिलियन पाउंड की बड़ी रकम खर्च की. 
 

एक रात ठहरने का किराया 25,000 पाउंड 
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एक रात ठहरने का किराया 25,000 पाउंड 
लंदन का सबसे खास इलाके में ऐतिहासिक इमारत में बनाया गया यह लग्जरी होटल तमाम राजशाही सुविधाओं से लैस है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रैफल्स लंदन को ओपनिंग के लिए तैयार करने तक तकरीबन 1.76 अरब डॉलर की रकम खर्च हुई है. खास बात ये है कि इस होटल में जिस-जिस जगह पर बड़े नेताओं के कार्यालय रहे, वहां हैरिटेज सुइट बनाए गए हैं. सुइट्स में विंस्टन चर्चिल का पुराना कार्यालय भी शामिल है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस सुइट में एक रात ठहरने के लिए 25,000 पाउंड खर्च करने होंगे.
 

इस होटल में 11 रेस्तरां और तीन बार
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इस होटल में नौ रेस्तरां और तीन बार
हिंदुजा ग्रुप द्वारा इसमें ऐतिहासिक OWO इमारत में तैयार किए गए रैफल्स लंदन होटल में सुइट्स के अलावा 85 आलीशान कमरे, 11 रेस्तरां और तीन बार बनाए गए हैं. होटल बनाने के दौरान पुरानी इमारत की बहुमूल्य चीजों को संरक्षित रखने की पूरी कोशिश की गई है. हाथ से बने मोजेक फर्श, ओक पैनलिंग, झूमर और एक शानदार संगमरमर की सीढ़ी को जस का तस रखा गया है. इमारत में अतिथियों के ठहरने के लिए कमरों और सुइट्स के अलावा एक भव्य बॉलरूम और मनोरंजन के लिए स्थान भी बनाया गया है.
 

भारत के लिए क्या था चर्चिल का नजरिया?
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भारत के लिए क्या था चर्चिल का नजरिया?
जिन विंस्टन चर्चिल का वार ऑफिस अब एक शानदार होटल में तब्दील किया गया है, उनका भारत के प्रति रुख विवादित रहा है. दरअसल, एक वक्त वॉर ऑफिस से अपना कामकाज देखने वाले विंस्टन चर्चिल भारत की आजादी के विरोधी थे. उन्होंने भारतीयों को मुफ्तखोर और दुष्ट तक बोल दिया था. चर्चिल पर आरोप लगे हैं कि 1942 में जब भारत में तूफान और बाढ़ के कारण अकाल पड़ा था, तब उन्होंने भारत को अनाज भेजने तक से रोक दिया था. अकाल के दौरान भारत की मदद करने को लेकर चल रही चर्चा में एक बार चर्चिल ने कहा था कि भारत को कितनी भी मदद कर दी जाए, कम ही होगी क्योंकि भारत के लोग खरगोश की तरह बच्चे पैदा करते हैं.

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