सेमीकंडक्टर (चिप) आज की दुनिया चलाने वाला वो पहिया है जो मोबाइल से लेकर लैपटॉप, कंप्यूटर और गाड़ियों तक में इस्तेमाल होता है. देश में अभी इसका मुख्य तौर पर आयात होता है और अब सरकार ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 76,000 करोड़ रुपये का पैकेज पेश किया है. देश के कुछ राज्य सेमीकंडक्टर उत्पादन का हब बनने की क्षमता रखते हैं जो चिप के मामले ‘आत्मनिर्भर भारत’ बना सकते हैं.
बढ़ रही सेमीकंडक्टर की खपत
कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की वजह वैश्विक स्तर पर चिप संकट पैदा हुआ और ये अब भी बना हुआ है. केपीएमजी इंडिया में पार्टनर नीरज बंसल का कहना है कि देश में सेमीकंडक्टर की खपत 15% की दर से बढ़ रही है. इसकी वजह देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिेंग उद्योग का विस्तार होना है. 2020 में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात पर 15 अरब डॉलर (करीब 1,130 अरब रुपये) खर्च किए और इसमें 37 प्रतिशत का आयात सिर्फ चीन से हुआ. अब जब देश में 5G टेक्नोलॉजी का विस्तार होगा तो सेमीकंडक्टर की खपत और बढ़ेगी ही. ऐसे में हमें इसके आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत है.
सरकार का 76,000 करोड़ का पैकेज
सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात घटाने के लिए 76,000 करोड़ रुपये का पैकेज पेश किया है. इसका लाभ सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बनाने की फैक्टरी लगाने वाले योग्य लोगों को मिलेगा. इसमें सरकार उनकी परियोजना की लागत का 50% तक खर्च उठाएगी.
इसके लिए भारत सरकार राज्यों के साथ मिलकर हाई-टेक क्लस्टर बनाने का काम करेगी, क्योंकि सेमीकंडक्टर इत्यादि की मैन्युफैक्चरिंग के लिए भूमि, अच्छी गुणवत्ता की बिजली, सेमीकंडक्टर ग्रेड का पानी, लॉजिस्टिक और रिसर्च इकोसिस्टम की जरूरत होगी.
ये राज्य बन सकते हैं सेमीकंडक्टर हब
बंसल ने हमारे सहयोगी प्रकाशन बिजनेस टुडे से कहा कि सेमीकंडक्टर की फैक्टरी लगाने के लिए ये सभी सुविधाओं की जरूरत पड़ेगी. साथ ही इन कारखानों को मोाबाइल, टीवी, इलेक्ट्रॉनिक्स और कार कंपनियों की फैक्ट्री के आसपास लगाया जा सकता है और इस मामले में गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां इन सभी की मैन्युफैक्चरिंग पहले से हो रही है. ऐसे में इन राज्यों में सेमीकंडक्टर हब बनने की पूरी क्षमता है.
भारत ने 2025 तक देश में 300 अरब डॉलर ( करीब 22,600 अरब रुपये) मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ उसके कंपोनेंट्स का उत्पादन भी शामिल है.
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