एबीजी शिपयार्ड (ABG Shipyard Ltd) घोटाले का दंश अब शेयर मार्केट (Share Market) को भी महसूस होने लगा है. यूक्रेन संकट (Ukraine Crisis) के चलते पहले से हलकान शेयर बाजार की हालत इस घोटाले की खबर सामने आने से और खराब हो रही है. सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी (NSE Nifty) ही नहीं बल्कि ब्रॉडर मार्केट में इसका असर देखने को मिल रहा है. लगभग सारे बैंकों के शेयर (Bank Share) इस खबर से प्रभावित हुए हैं.
पहले से खराब है बाजार की हालत
आज घरेलू शेयर बाजार ने कारोबार और सप्ताह दोनों की शुरुआत भारी-भरकम नुकसान उठाकर की. सेंसेक्स एक समय तो 1,500 अंक तक गिर गया. दोपहर तक के कारोबार में कभी भी यह गिरावट 1000 अंक से कम नहीं हो पाई. दोपहर 12:30 बजे सेंसेक्स 1200 अंक से ज्यादा गिरा हुआ था. निफ्टी भी 2.10 फीसदी के नुकसान के साथ 17 हजार अंक के आस-पास ट्रेड कर रहा था.
बैंकिंग इंडेक्स को भारी नुकसान
एनएसई पर सबसे ज्यादा गिरावट Nifty PSU Bank इंडेक्स में देखने को मिली. दोपहर के कारोबार में यह 3.50 फीसदी तक के नुकसान में थे. निफ्टी बैंक (Nifty Bank) 2.80 फीसदी से ज्यादा और निफ्टी प्राइवेट बैंक (Nifty Pvt Bank) 2.25 फीसदी के आस-पास लुढ़का हुआ था. इसी तरह बीएसई पर S&P BSE Bankex इंडेक्स 3.15 फीसदी के नुकसान में ट्रेड कर रहा था.
इतने गिरे बैंकों के स्टॉक
बीएसई पर लिस्टेड सारे बैंक बड़ी गिरावट में ट्रेड कर रहे हैं. दोपहर के कारोबार में फेडरल बैंक (Federal Bank) सबसे ज्यादा 4.90 फीसदी के नुकसान में था. बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank Of Baroda) भी 4 फीसदी से ज्यादा गिरा हुआ था. एसबीआई (SBI) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) 3.80 फीसदी तक गिरे हुए थे. ऐसे ही कोटक बैंक (Kotak Bank), एक्सिस बैंक (Axis Bank), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), इंडसइंड बैंक (Indusind Bank), बंधन बैंक (Bandhan Bank) सभी के स्टॉक बड़े नुकसान में ट्रेड कर रहे थे.
भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला
एबीजी शिपयार्ड के इस घोटाले (ABG Shipyard Fraud) में 22,842 करोड़ रुपये के फ्रॉड की जानकारी सामने आई है. इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला माना जा रहा है. सीबीआई (CBI) ने हाल ही में इस घोटाले को लेकर कंपनी के पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के खिलाफ मामला दर्ज किया है. एबीजी शिपयार्ड को आईसीआईसीआई बैंक की अगुवाई में करीब दो दर्जन बैंकों के एक समूह ने लोन दिया था. फोरेंसिक ऑडिट में पता चला है कि बैंकों से मिले इस फंड का गलत तरीके से हेरफेर किया गया है.