Air India को तीन सरकारी तेल कंपनियों (PSU oil companies) को करीब 5,000 करोड़ रुपये के ईंधन बिल (ATF Bill) का बकाया चुकाना है. लेकिन इस बकाये को जल्द वापस मिलने की कोई सूरत बनते न देख तेल कंपनियां क्रूड ऑयल खरीदने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो सकती हैं.
इसे लेकर तेल कंपनियां परेशान दिख रही हैं. गौरतलब है कि एअर इंडिया, टाटा ग्रुप के हाथों बिक चुकी है और अब यह करीब 5,000 करोड़ रुपये का बकाया सरकार को चुकाना है. यह बकाया पिछले करीब दो साल से है.
तेल कंपनियों से हुए एग्रीमेंट के मुताबिक एअर इंडिया को तीन महीने की क्रेडिट पर एटीएफ मिलता था, लेकिन भारी घाटे में चल रही एअर इंडिया कई साल तक यह बकाया नहीं चुका पाई. अब यह पैसा सरकार को चुकाना है, लेकिन अभी सरकार ने इसको लेकर किसी टाइमलाइन का ऐलान नहीं किया है कि यह बकाया कब तक चुकाया जाएगा.
कच्चा तेल महंगा होने से बढ़ी परेशानी
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों को इन दिनों पैसे की काफी जरूरत है. रुपये में गिरावट है और क्रूड के दाम काफी बढ़ गए हैं, जिसकी वजह से तेल कंपनियों को ईंधन खरीदने के लिए बड़े पैमाने पर नकदी की जरूरत है.
टाटा समूह से हुई डील के मुताबिक, सरकार ने यह कहा है कि वह एअर इंडिया का करीब 16,000 करोड़ रुपये का कुल बकाया चुकाएगी. इसमें से ही 5,000 करोड़ रुपये का बकाया तेल कंपनियों का है. इसमें से सबसे ज्यादा 3,000 करोड़ रुपये का बकाया (करीब 60%) इंडियन ऑयल का है. बाकी करीब 2,000 करोड़ रुपये का कर्ज भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का है.
गौरतलब है कि कच्चे तेल (Brent crude) की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सात साल के उच्च स्तर 85 डॉलर के आसपास पहुंच गई है. यही नहीं, देश में कोरोना संकट कम होने के बाद से ही पेट्रोल-डीजल, हवाई ईंधन की खपत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में इंडियन ऑयल और अन्य कंपनियों को अब क्रूड खरीदने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है.
सरकार कैसे चुकाएगी बकाया?
असल में एअर इंडिया की कुछ नॉन-कोर एसेट का स्वामित्व सरकार के पास रह गया है, जिनकी बिक्री से ही यह बकाया चुकाने की योजना है. इस एसेट की कीमत करीब 16,000 करोड़ रुपये है. इसके लिए एक होल्डिंग कंपनी (Air India Asset Holding Company) बनाई जाएगी. लेकिन कंपनी द्वारा सारे एसेट बेचकर पैसा जुटाने में काफी समय लग सकता है.