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चीन की रियल एस्टेट कंपनी Evergrande डूबने की कगार पर, दुनिया के शेयर बाजारों को क्यों आ रहा बुखार? 

China crisis: भारी कर्ज में डूबी चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी Evergrande के डूबने की आशंका जताई जा रही है और इसके शेयर 11 साल के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. इसका असर चीन की समूची अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है.

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चीनी कंपनी Evergrande की हालत खस्ता (फाइल फोटो)
चीनी कंपनी Evergrande की हालत खस्ता (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीन की कंपनी Evergrande संकट में
  • इसका दुनिया के शेयर बाजारों पर असर

चीन की एक रियल एस्टेट कंपनी Evergrande दिवालिया होने की कगार पर है और इसका असर पूरी दुनिया के शेयर बाजारों (Share Market) पर पड़ा है. एवरग्रैंड के ऊपर करीब 304 अरब डॉलर (करीब 22.45 लाख करोड़ रुपये) का कर्ज है. आशंका है कि यह कहीं चीन में अमेरिका के सब-प्राइम और लीमैन ब्रदर्स जैसा संकट न साबित हो जाए. 

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अंतरराष्ट्रीय सेंटिमेंट खराब होने का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख रहा है. मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार खुला तो हरे निशान में लेकिन बाद में इसमें उतार-चढ़ाव होने लगा. इसी तरह बुधवार को भी भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव है. भारी कर्ज में डूबी हांगकांग (चीन) की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी  Evergrande के डूबने की आशंका जताई जा रही है और इसके शेयर 11 साल के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. Evergrande खस्ताहाल है और इसका असर चीन की समूची अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जाने लगी. 

दुनिया के बाजारों पर क्या असर 

इसकी वजह से सोमवार को दुनिया के प्रमुख शेयर बाजार ध्वस्त हो गए थे. ज्यादातर बाजारों में 2 से 3 फीसदी के बीच गिरावट आई थी. मंगलवार को भी दुनियाभर के ज्यादातर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया. चीन असल में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इस पर किसी तरह के नेगेटिव असर से बाजारों में कंपकंपी आनी स्वाभाविक है. भारत में कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी एवं सीईओ उदय कोटक ने इसे अमेरिका के लीमैन जैसा संकट बताया है.

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गौरतलब है कि साल 2008 में अमेरिका में रियल एस्टेट कंपनियों के डिफाल्ट होने से ही सब-प्राइम संकट खड़ा हुआ था और लीमैन जैसे दिग्गज बैंक ढह गए थे. इसकी वजह से अमेरिका सहित दुनिया के कई देश मंदी के चपेट में आ गए थे. 

304 अरब डॉलर के भारी कर्ज में डूबी है कंपनी 

कंपनी ने खुद अपने निवेशकों को यह चेतावनी दी है कि वे उसके शेयरों की खरीद-फरोख्त में सचेत रहें. एवरग्रैंड के ऊपर करीब 304 अरब डॉलर का कर्ज है. चीन की अर्थव्यवस्था पर इसका असर इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें करीब 2 लाख कर्मचारी काम करते हैं. चीन के रियल एस्टेट सेक्टर की यह दिग्गज कंपनी है. ये कंपनी अगर दिवालिया होती है तो सबसे पहले तो वो लोग प्रभावित होंगे जिन्होंने इसके प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन से पहले ही मकान खरीदे थे. ऐसे करीब 15 लाख खरीदारों द्वारा जमा एडवांस रकम फंस सकती है.  

ऐसे हजारों लोगों की गाढ़ी कमाई डूब सकती है. देश-विदेश की कई ऐसी कंपनियां भी हैं जो एवरग्रैंड के साथ कारोबार करती हैं. उन फर्मों को नुकसान का खतरा है. ये भी आशंका है कि एवरग्रांड से जुड़ी कई छोटी या बड़ी कंपनियां भी दिवालिया हो सकती हैं.  

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Evergrande ग्रुप बिक्री के लिहाज से चीन की दूसरी और हांगकांग की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी है. इसे Fortune ग्लोबल 500 में 122वें स्थान पर जगह दी गई थी. इसका चीन के 170 से ज्यादा शहरों में प्रोजेक्ट है. इसका मुख्यालय गुवांगडोंग प्रांत के नानशान जिले में स्थ‍ित हाउहाई फाइनेंशियल सेक्टर में है. चार साल पहले साल 2018 में ही इसे दुनिया की सबसे वैल्युएबल रियल एस्टेट कंपनी का दर्जा दिया गया था. 

इसके पहले साल 2013 में कंपनी की बिक्री ने पहली बार 100 अरब युआन (करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये) का आंकड़ा पार किया था. साल 2014 तक कंपनी ने लगातार पांच साल तक 30 फीसदी की रिकॉर्ड सालाना औसत बढ़त दर हासिल की. कंपनी की सालाना रिपोर्ट के अनुसार उसने साल 2020 में करीब 19 अरब डॉलर का ग्रॉस प्रॉफिट हासिल किया है और इसमें से नेट प्रॉफिट करीब 5 अरब डॉलर का है. 

कहां आई समस्या 

कंपनी के बहीखाते के मुताबिक इसके ऊपर करीब 304 अरब डॉलर का कर्ज है, जिसमें उधारी, कॉन्ट्रैक्ट देनदारी, इनकम टैक्स देनदारी आदि शामिल हैं. कहा जाता है कि एवरग्रैंड ने बैंकों के कर्ज को नजरअंदाज करते हुए अपने विस्तार पर जोर दिया. कंपनी ने कई साल तक चीन समेत दुनियाभर के बाजारों को ये एहसास नहीं होने दिया कि वो भारी कर्ज में है. पिछले साल जब चीन की सरकार ने नियमों में बदलाव किए तब देश को पहली बार पता चला कि कंपनी कर्ज में है.

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कंपनी ने कहा है कि प्रॉपर्टी डेवलपमेंट से जुड़ा कुछ भुगतान वह नहीं कर पा रही है जिसकी वजह से कई प्रोजेक्ट का काम रोक दिया गया है. कंपनी ने 14 सितंबर को एक बयान में कहा था कि, 'सितंबर में कॉन्ट्रैक्ट सेल में भारी गिरावट आने की आशंका है, जिसकी वजह से समूह के कैश कलेक्शन में लगातार गिरावट हो सकती है और इसकी वजह से समूह के कैशफ्लो पर भारी दबाव आ सकता है.' 

पिछले हफ्ते ऐसी खबरें आईं कि चीन सरकार ने कंपनी को कर्ज देने वाले बैंकों-संस्थाओं से कह दिया था कि Evergrande सोमवार को ब्याज भुगतान करने में समर्थ नहीं रहेगी. 

क्या कहना है कंपनी का 

इस साल 14 सितंबर को कंपनी ने कहा कि वह अपने कुछ एसेट बेचने की संभावना तलाश रही है और संभावित निवेशकों से भी बातचीत कर रही है. हालांक‍ि कंपनी ने यह स्वीकार किया कि इसमें कुछ ठोस प्रगति नहीं हो पाई है. यही नहीं कंपनी की हांगकांग में स्थित ऑफिस बिल्ड‍िंग को बेचने की योजना भी समय से परवान नहीं चढ़ पाई है. 

कंपनी के शेयर 2.20 हांगकांग डॉलर के आसपास आ गए हैं. साल 2017 में कंपनी के अच्छे दिनों में इसके शेयर सिर्फ 10 महीने के भीतर 5 हांगकांग डॉलर से 32 हांगकांग डॉलर तक पहुंच गए थे. तब कंपनी के संस्थापक Xu Jiayin एश‍िया के टॉप अमीरों में शामिल हो गए थे. लेकिन जुलाई 2020 से इसमें गिरावट आनी शुरू हो गई. पिछले एक महीने में इस शेयर में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. 

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भारत पर क्या हो सकता है असर

कई जानकारों का कहना है कि चीन में यदि समस्या बनी रही तो वहां की मुद्रा युआन कमजोर हो सकती है और इसका असर भारतीय रुपये जैसी अन्य एश‍ियाई मुद्राओं पर भी हो सकता है. इससे निकट भविष्य में एफआईआई अपना निवेश कुछ हद तक एशियाई बाजारों से निकाल भी सकते हैं. 

भारत की कई कंपनियां भी Evergrande से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ी हैं. इनमें प्रमुख तौर पर स्टील, केमिकल्स और मेटल सेक्टर की कंपनियां हैं. एवरग्रैंड के दिवालिया होने की स्थिति में टाटा स्टील, सेल, जिंदल स्टील, वेदांता, अडानी एंटरप्राइजेज जैसी बड़ी कंपनियों को भी नुकसान की आशंका है. सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड स्टील, केमिकल्स और मेटल कंपनियों के शेयर बुरी तरह धाराशायी हो गए. हालांकि अब ये शेयर थोड़े संभले दिख रहे हैं. 


 

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