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अनिल अग्रवाल को पहली कंपनी के लिए 16 लाख जुटाने में लेना पड़ा था कर्ज, आज 35000 करोड़ रुपये के मालिक

Anil Agarwal First Company: अनिल अग्रवाल ने सोमवार को एक के बाद एक सीरिज में Tweet करते हुए पूरी कहानी बताई. उन्होंने बताया कि उनके पास किसी कंपनी को खरीदने का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन इसके बाद भी वह आगे बढ़ते रहे. यहां पढ़िए पूरी कहानी...

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16 लाख में खरीदी पहली कंपनी (Photo: Twitter/AnilAgarwal_Ved)
16 लाख में खरीदी पहली कंपनी (Photo: Twitter/AnilAgarwal_Ved)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं पुराने किस्से
  • पहली कंपनी खरीदने के लिए लेना पड़ा था कर्जा

प्रसिद्ध उद्योगपति एवं वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वह अक्सर Twitter पर अपने पुराने दिनों की कहानी लोगों के साथ साझा करते हैं और बताते हैं कि किस तरह से उन्होंने एक-एक कदम बढ़ाते हुए ऊचांइयां हासिल की. भारत के सबसे सफल उद्योगपतियों में से एक अनिल अग्रवाल की कहानी को लोग खूब पसंद भी करते हैं. हाल ही में इसी तरह के एक पोस्ट में उन्होंने पहली कंपनी खरीदने की कहानी साझा की है.

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ये थी अनिल अग्रवाल की पहली कंपनी

अनिल अग्रवाल ने सोमवार को एक के बाद एक सीरिज में Tweet करते हुए पूरी कहानी बताई. उन्होंने बताया कि उनके पास किसी कंपनी को खरीदने का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन इसके बाद भी वह आगे बढ़ते रहे. उन्होंने बताया, 'शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी दिवालिया हो गई थी और तभी से मैं उस कंपनी को खरीदने का सपना देखने लगा था. मैं हर रोज रिसीवर के दफ्तर जाता था और ज्यादा से ज्यादा इंफॉर्मेशन जमा करने के लिए इस दरवाजे से उस दरवाजे को खटखटाता था.

इन दो लोगों ने की वेदांता चेयरमैन की मदद

वेदांता चेयरमैन ने आगे बताया, 'मुझे पता चला कि कंपनी खरीदने के लिए 16 लाख रुपये डाउनपेमेंट करने की जरूरत होगी, जो कि मेरे पास नहीं थे. मुझे यह सोच-सोचकर कई रातों तक नींद नहीं आई कि इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था कैसे करूंगा. फिर दो ऐसे लोगों से मुझे सबसे अधिक मदद मिली, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. इन दोनों में से एक थे Gagart and Comapny के टॉप वकील नितिन कांटावाला और सिंडिकेट बैंक के मैनेजर दिनकर पई. दोनों ने मुझे रिसर्च, ऑक्शन और कोर्ट की मंजूरियों में मदद की.'

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कर्ज लेकर जुटाए कंपनी खरीदने के पैसे

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने इस बात का ब्यौरा दिया कि किस तरह से 16 लाख रुपये जुटाए गए. उन्होंने कहा, 'मैंने लोन के जरिए रकम का प्रबंध किया. इनमें से 6 लाख रुपये अपने सोर्सेज से जुटाए, 5 लाख रुपये घरवालों से लिए और मेटल ब्रोकर रसिक भाई ने बाकी के 5 लाख रुपये दिए. जब मई 1976 में मैं कंपनी खरीदने के कागज पर साइन कर रहा था तो मेरी आंखों में खुशी के आंसू थे और मेरी खुशी रुक नहीं रही थी. हालांकि मुझे तब भी नहीं पता था कि इसके साथ ही एक शानदार रॉलरकोस्टर जर्नी शुरू हो रही है.'

यूनिवर्स भी करता है सपना पूरा करने में मदद

अग्रवाल बताते हैं कि अगर कोई काम करने का सही से प्रयास किया जाए तो पूरा यूनिवर्स मदद करने लग जाता है. वह लिखते हैं, 'जब आप आगे बढ़ते हैं तो नए दरवाजे खुद ही खुलने लगते हैं. आप नए लोगों से मिलते हैं, जो आपकी मदद करने के लिए सामने आते हैं. मैंने पाया कि जब आप प्रयास करते हैं और वास्तव में अपने सपनों को हकीकत में बदलने का प्रयास करते हैं तो यूनिवर्स रहस्यमय तरीके से आपको ऐसा करने में मदद करता है.'

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अभी इतनी दौलत के मालिक हैं अनिल अग्रवाल

Forbes के अनुसार, वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल का कुल नेटवर्थ 440 करोड़ डॉलर यानी करीब 35 हजार करोड़ रुपये है. मेटल किंग नाम से मशहूर अग्रवाल अभी लंदन में रहते हैं. उनके पास भारत की भी नागरिकता है और वह देश के 63वें सबसे रईस व्यक्ति हैं. उन्होंने प्राइवेटाइज हो रही सरकारी कंपनियों में हिस्सा खरीदने के लिए अलग से 10 बिलियन डॉलर का फंड तैयार किया है.

 

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