अनिल अंबानी (Anil Ambani) का दावा है कि NCLT ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) की सहायक कंपनी मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ SBI और IDBI बैंक द्वारा दायर दिवालियापन याचिका को खारिज कर दिया है. कंपनी ने 15 अप्रैल को शेयर बाजार को यह जानकारी दी, जिसके बाद गिरते बाजार में भी रिलायंस इंफ्रा के शेयर मामूली तेजी पर बंद हुए.
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) के खिलाफ एसबीआई और आईडीबीआई बैंक की याचिकाओं को NCLT मुंबई द्वारा ओटीएस के मद्देनजर निपटाया गया है. रिलायंस इंफ्रा ने बताया कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) के साथ कंपनी का एक संयुक्त कारोबार है, जिसमें रिलायंस इंफ्रा की 74 फीसदी हिस्सेदारी और एमएमआरडीए की 26 फीसदी हिस्सेदारी है.
कंपनी पर इतना भारी कर्ज
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और आईडीबीआई बैंक ने बकाया वसूली के लिए पिछले साल एमएमओपीएल के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की थी. एमएमओपीएल रिलायंस इंफ्रा की सहायक कंपनी है. इस कंपनी को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ एक संयुक्त प्रोजेक्ट मिला था. इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी ने कंसोर्टियम में कुल 1,711 करोड़ रुपये कर्ज लिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा था आदेश
इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले को पलट दिया, जिसने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को रिलायंस इंफ्रा की सहायक कंपनी, दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड को लगभग 8,000 करोड़ रुपये देने के लिए कहा गया था. सुप्रीम कोर्ट ने डीएमआरसी की ओर से दाखिल क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी देते हुए अनिल अंबानी को ये बड़ा झटका दिया था.
इतना नुकसान करा चुके हैं रिलायंस के शेयर
सोमवार को रिलायंस इंफ्रा के शेयर (Reliance Infrastructure Share) 198.90 रुपये पर मामूली तेजी के साथ बंद हुए. पांच दिन के दौरान इसके शेयर में 33.64% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि एक महीने के दौरान 22.29% की गिरावट आई है. छह महीने में ये स्टॉक 16.49% चढ़ा है.