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अप्रैल के बाद मनरेगा में मजदूरों की आमदनी डबल, काम भी अधिक मिले

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स की मानें तो पिछले वित्त-वर्ष की तुलना में मौजूदा वित्त-वर्ष के शुरुआती 4 महीनों में मजदूरों को हर महीने दोगुनी आमदनी हुई है.

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लॉकडाउन में मनरेगा का सहारा
लॉकडाउन में मनरेगा का सहारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 509 रुपये की तुलना में 1000 रुपये महीने की आय
  • लॉकडाउन में मजदूरों को एकमात्र मनरेगा का सहारा
  • मजदूरी बढ़ने से भी मजदूरों की दिहाड़ी में हुआ इजाफा

कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन के दौरान और फिर उसके बाद ग्रामीण इलाकों में मनरेगा मजदूरों के लिए सबसे फायदेमंद योजना साबित हुई है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स की मानें तो पिछले वित्त-वर्ष की तुलना में मौजूदा वित्त-वर्ष के शुरुआती 4 महीनों में मजदूरों को हर महीने दोगुनी आमदनी हुई है. 

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दरअसल, लॉकडाउन के दौरान मनरेगा में कार्य दिवसों में वृद्धि के कारण के ये आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में मजदूरों को प्रति व्यक्ति प्रति माह लगभग 509 रुपये की औसत आय हुई थी, वहीं इस साल यह बढ़कर लगभग 1,000 रुपये हो गई है. क्योंकि अप्रैल से जुलाई के बीच मनरेगा में औसत से अधिक दिन काम मिले हैं. 

हालांकि क्रिसिल रेटिंग्स का कहना है कि पूरे साल के मुकाबले आमतौर पर अप्रैल से जुलाई के बीच 25 फीसदी अधिक दिन मनरेगा में काम होते हैं. साथ ही मनरेगा में मजदूरी बढ़ने से भी मजदूरों को राहत मिली है. हाल ही में भारत सरकार ग्रामीण मंत्रालय ने मनरेगा मजदूरों की मजदूरी बढ़ाकर 202 रुपये प्रतिदिन कर दी है.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बजट 2020-21 में मनरेगा के लिए 61,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था. लेकिन कोरोना संकट को देखते हुए सरकार ने फिर इस योजना के लिए अलग से 40 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया है. ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इस महामारी का कम असर पड़े. मनरेगा योजना में मजदूरों को अधिकतम 100 दिन तक रोजगार की गारंटी दी जाती है.
 

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