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अधर में Big Bazaar का Future, Reliance ने कहा- अब Deal संभव नहीं

बिग बाजार जैसे बड़े रिटेल ब्रांड का भविष्य करीब पौने 2 साल से अधर में लटका है और अब इसका आगे क्या होगा ये साफ नहीं है. क्योंकि इसके फ्यूचर को संवारने के लिए हुई Future-Reliance Deal अब पूरी नहीं हो सकती है.

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रिलायंस का कहना, फ्यूचर ग्रुप के साथ अब डील संभव नहीं
रिलायंस का कहना, फ्यूचर ग्रुप के साथ अब डील संभव नहीं
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 69.29% क्रेडिटर्स ने खारिज की डील
  • Amazon के साथ लंबा चला विवाद
  • अब दिवाला प्रक्रिया से होगा फैसला

लगभग पौने 2 साल मामला खिंचने के बाद Future-Reliance Deal अब पूरी नहीं हो सकती है. फ्यूचर रिटेल ( Future Retail) के सिक्योर्ड क्रेडिटर्स के इस डील के विरोध में मतदान करने के चलते अब इसे अंजाम तक पहुंचा पाना संभव नहीं है.

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रिलायंस ने कहा-अब संभव नहीं
रॉयटर्स की खबर के मुताबिक Reliance Industries ने शनिवार को एक रेग्युलेटरी अपडेट में कहा, 'फ्यूचर रिटेल के अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स और शेयरहोल्डर्स ने इस डील के पक्ष में मतदान दिया है. लेकिन कंपनी के सिक्योर्ड क्रेडिटर्स के इस डील के खिलाफ वोट देने से 'अब इस डील को पूरा नहीं किया जा सकता है.'

69.29% क्रेडिटर्स ने खारिज की डील
फ्यूचर रिटेल ने शुक्रवार को अपडेट दिया था कि इस डील पर शेयरहोल्डर्स और क्रेडिटर्स की मंजूरी लेने की वोटिंग प्रक्रिया उसने पूरी कर ली है. 

सिक्योर्ड क्रेडिटर्स की कैटेगरी में इस डील के पक्ष में 30.71% वोट पड़े. जबकि 69.29% ने इसका विरोध किया है. 

वहीं शेयर होल्डर्स की कैटेगरी में डील के पक्ष में 85.94% और विरोध में 14.06% वोट पड़े. वहीं अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स में 78.22% इसका पक्ष लिया तो 21.78% इसके विपक्ष में रहे.

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चाहिए थे 75% के बराबर वोट
किसी कंपनी के लिए सिक्योर्ड क्रेडिटर्स काफी अहम होते हैं, क्योंकि कंपनी के एसेट बिकने की नौबत आने पर पेमेंट के मामले में उन्हें अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स के ऊपर वरीयता मिलती है.

ऐसे में नियम के मुताबिक इस डील को पूरा करने के लिए कंपनी को बैठक में मौजूद सभी क्रेडिटर्स में से 51% के वोट पक्ष में चाहिए थे. लेकिन इन 51% क्रेडिटर्स द्वारा कंपनी को दिए गए कर्ज का मूल्य कुल कर्ज के 75% के बराबर होना चाहिए. कंपनी के कुल कर्ज में 80% हिस्सेदारी स्थानीय बैंकों की है.

Amazon के साथ लंबा चला विवाद
Reliance ने देश के रिटेल सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अगस्त 2020 में Future Group के रिटेल बिजनेस को खरीदने की 24,713 करोड़ रुपये की डील की थी. लेकिन इस मामले में ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने एक कानूनी पेंच फंसा दिया. इसके बाद मामला सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत से लेकर प्रतिस्पर्धा आयोग और देश की सर्वोच्च अदालत तक गया. लेकिन नतीजा नहीं निकल सका.

इसके बाद रिलायंस ने हाल में कंपनी के Big Bazaar और अन्य स्टोर का लीज डॉक्यूमेंट गिरवी होने के नाम पर टेकओवर करना शुरू कर दिया. इस डील को लेकर विवाद यहीं नहीं थमा. इससे जुड़े एक मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 28 फरवरी 2022 को फ्यूचर ग्रुप को एक आदेश दिया कि वह डील पर अपने शेयर होल्डर्स और क्रेडिटर्स की मंजूरी ले. इसके बाद समूह ने इसके लिए बैठक बुलाई, जिसे एमेजॉन ने 'अवैध' करार दिया.

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अब NCLT से होगा फैसला
क्रेडिटर्स के डील के विरोध में फैसला करने के बाद अब Future Retail को NCLT में दिवाला प्रक्रिया का सामना करना होगा. पिछले हफ्ते ही कंपनी को लोन देने वाले सरकारी बैंक Bank of India ने NCLT में कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की याचिका दायर की थी.

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