वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे को लेकर केंद्र पर कांग्रेस शासित राज्य दबाव तो बना ही रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शासन वाले राज्य भी खस्ताहाल राजस्व की हालत को देखते हुए इसकी मांग करने लगे हैं. हरियाणा ने भी केंद्र से राज्य का 5,840 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा बकाया जल्द से जल्द देने की मांग की है.
कर्ज लेने का मिला है विकल्प
गौरतलब है कि हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है. वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की 41वीं बैठक 27 अगस्त को संपन्न हुई. मुआवजे की राज्यों की मांग पर केंद्र ने कर्ज लेने का विकल्प पेश कर दिया है. राज्यों से कर्ज लेकर समस्या दूर करने को कहा जा रहा है.
राज्यों को 2 विकल्प दिए गए हैं. पहला, रिजर्व बैंक की सलाह से राज्यों को एक विशेष विंडो दिया जाए ताकि वे वाजिब ब्याज दर पर 97,000 करोड़ रुपये रकम उधार हासिल कर पाएं. दूसरा, राज्य एक विशेष विंडो के द्वारा समूचे जीएसटी कम्पेनसेशन की कमी के बराबर यानी 2.35 लाख करोड़ रुपये का उधार ले सकें. इन दोनों विकल्पों पर अब राज्य 7 दिनों के भीतर अपनी राय देंगे.
राज्य की अर्थव्यवस्था की हालत खराब
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने शक्रवार को कहा कि राज्य का जीएसटी मुआवजा पिछले चार माह से लंबित है और इसे जल्द दिया जाना चाहिए. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्य सरकार के एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि गुरुवार को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में भी राज्य ने यह मांग उठाई है.
बयान के जीएसटी काउंसिल की बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भाग लेते हुए चौटाला ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से प्रदेश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. उन्होंने केंद्र से राज्य को अधिकतम वित्तीय मदद उपलब्ध कराने का अनुरोध किया.
पांच साल के बाद भी दिया जाए मुआवजा
चौटाला ने कहा, 'जीएसटी की वजह से राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई पांच साल की अवधि के बाद यानी 2022 के बाद भी की जानी चाहिए. हरियाणा मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के मामले में अग्रणी राज्य है, लेकिन जीएसटी प्रणाली के क्रियान्वयन के बाद राज्य का राजस्व संग्रहण बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कोविड-19 महामारी की वजह से भी राज्य का राजस्व प्रभावित हुआ है.