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'ऑल इज वेल'... किसान और जवान नहीं हैं नाराज! BJP की ये रणनीति हरियाणा में आई काम

हरियाणा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा 'जवान' का था, कांग्रेस ने इसे सीधे अग्निवीर से जोड़ दिया था, क्योंकि सेना में करीब 10 फीसदी हरियाणा से जवान होते हैं. जबकि हरियाणा की आबादी करीब 3 करोड़ है.

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Haryana Assembly Election Result
Haryana Assembly Election Result

हरियाणा का रिजल्ट चौंकाने वाला नहीं है, हैरान भी नहीं करता. अगर आप बीजेपी की राजनीति और रणनीति को करीब से जानते हैं तो फिर हरियाणा का रिजल्ट उसी का नतीजा है.

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दरअसल चुनाव में कांग्रेस ने किसान, जवान और पहलवान का मुद्दा खूब उछाला. खासकर किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस ने बीजेपी को खूब घेरा, यहां तक कह दिया कि अगर हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनती है तो अपनी मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर पर बैठे किसानों को दिल्ली जाने के लिए हरियाणा की सीमाएं खोल दी जाएंगी. खासकर जाट बिरादरी को बीजेपी से झिटकाने के लिए खूब रणनीति बनाई गई.

एक तरह ये दिखाने की कोशिश हुई थी, हरियाणा के किसान बीजेपी से नाराज हैं, और इस बार किसान बीजेपी को सबक सिखा देंगे. लेकिन अब जिस तरह से परिणाम आ रहे हैं, उससे लग रहा है कि अगर किसान नाराज थे, तो कैसे मान गए और बीजेपी ने क्या रणनीति अपनाई?

क्या हकीकत में किसान नाराज थे? 

हरियाणा चुनाव में दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा 'जवान' का था, कांग्रेस ने इसे सीधे अग्निवीर से जोड़ दिया था, क्योंकि सेना में करीब 10 फीसदी जवान हरियाणा से होते हैं. जबकि हरियाणा की आबादी करीब 3 करोड़ है. यही नहीं, हरियाणा में घर-घर से किसान और जवान का मुद्दा जुड़ा हुआ है. कांग्रेस ने केंद्र सरकार की 'अग्निवीर योजना' को जवानों के साथ सबसे बड़ा धोखा बताया. वैसे लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने यही मुद्दे देशभर में उठाए थे. हरियाणा में 5-5 लोकसभा सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस को जीत मिली थी.

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वैसे भी जवान और किसान के मुद्दे सबसे ज्यादा हरियाणा में ही थे. किसानों का मुद्दा पंजाब में भी है. लेकिन बीजेपी वहां दौड़ में नहीं है. ऐसे में अगर हरियाणा में तीसरी बार बीजेपी की सरकार बनती है तो एक तरह ये साबित हो जाएगा कि जवान और किसान को लेकर जो नाराजगी की बात कही जाता है, वो असलियत में नहीं है. 

साथ ही हरियाणा के जाटलैंड में बीजेपी को जिस तरह से कामयाबी मिल रही है, उससे फिर सवाल उठता है कि किसान और जवान का मुद्दा है कहां? फिर क्या आगे कांग्रेस इन मुद्दों को उठाने की स्थिति में होगी. इस चुनाव परिणाम ये भी साफ हो जाएगा कि 'अग्निवीर स्कीम' को लेकर विपक्ष जो नेरेटिव सैट कर रहा था, उसका जमीन पर कोई असर नहीं हो रहा है. अगर हरियाणा की जनता अग्निवीर स्कीम को सही मानती है तो फिर विपक्ष के लिए ये मुद्दा उठाना आसान नहीं होगा.

अग्निवीर योजना की स्वीकार्यता बढ़ी

दरअसल, हरियाणा चुनाव के ठीक पहले बीजेपी ने अपनी रणनीति में थोड़ी बदलाव जरूरी की, आखिर के दिनों में बीजेपी किसान सम्मान निधि की राशि को 6 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये करने का ऐलान कर दिया. साथ ही अग्निवीर मसले को लेकर बीजेपी ने हर हरियाणा के अग्निवीर को पक्की नौकरी का वादा कर दिया. जिससे लोगों में ये संदेश गया कि पक्की नौकरी जब मिलेगी ही, तो फिर बीजेपी से कैसी नाराजगी. 

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ऐसे में ये कहा जा सकता है कि अग्निवीर और किसानों के मुद्दों पर जनता का साथ बीजेपी को मिला है, और अब बीजेपी इसे देश के दूसरे राज्यों में भी भुनाएगी. इसके साथ ही अग्निवीर स्कीम की स्वीकार्यता भी बढ़ी है और साथ ही किसान जिन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, उन्हें भी अब विचार करना होगा.

हरियाणा में हैट्रिक... बीजेपी के लिए बूस्टर डोज

बता दें, लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के लिए हरियाणा का चुनाव लिटमस टेस्ट था. इस टेस्ट में बीजेपी को जोरदार कामयाबी मिली है, अब आगे महाराष्ट्र, और झारखंड में चुनाव होने वाले हैं. जहां हरियाणा चुनाव का साफ मैसेज जाएगा कि किसान और जवान बीजेपी के साथ हैं. अगर हरियाणा में तीसरी बार सरकार बीजेपी की बन रही है तो ये अपने आप में इतिहास है. साथ ही ये साफ हो रहा है कि किसान, जवान और पहलवान का मुद्दा जमीन पर नहीं है. ये बीजेपी के लिए बड़ी राहत भी है.

इस बीच अब अब कांग्रेस से अंदर ही विरोध के सुर उठने लगे हैं, कुमारी सैलजा का कहना है कि इतना कुछ के बाद भी अगर बीजेपी हरियाणा में जीत रही है तो फिर हमें ये देखना होगा कि उनकी चुनावी रणनीति कैसी थी, उनके मुद्दे क्या थे, और हमने जो मुद्दे उठाए वो कैसे थे? 

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