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Share Market Bloodbath: चार महीने के निचले स्तर पर बाजार, मिनटों में हजारों करोड़ स्वाहा!

Share Market Bloodbath: बाजार में चारों तरफ हाहाकार का माहौल रहा. सारे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे. इस गिरावट में इन्वेस्टर्स ने चंद मिनटों के कारोबार में हजारों करोड़ गंवा दिए.

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चंद मिनटों में डूब गए हजारों करोड़
चंद मिनटों में डूब गए हजारों करोड़
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चार महीने के निचले स्तर पर बाजार
  • तेजी से बढ़ रहे हैं ओमिक्रॉन केे मामले

कोरोना महामारी (Corona Pandemic) की अगली लहर की आशंका के बीच ओमिक्रॉन (Omicron) के तेजी से बढ़ते मामलों ने सोमवार को बाजार को बदहाल कर दिया. मार्केट पिछले सप्ताह से प्रेशर में है और सोमवार को कारोबार खुलने पर इससे छुटकारा मिलने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है. शुरुआती कारोबार में करीब ढाई फीसदी की इस गिरावट ने बाजार को एक झटके में चार महीने के निचले स्तर पर पटक दिया.

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इन्वेस्टर्स के लिए खूनी सोमवार

घरेलू बाजार प्री-ओपन सेशन में ही 0.50 फीसदी से अधिक की गिरावट में थे. जैसे ही सेशन ओपन हुआ, बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और एनएसई निफ्टी (NSE Nifty) दोनों एक फीसदी से अधिक टूट गए. सुबह 10:30 बजे तक यह गिरावट करीब ढाई फीसदी की हो गई. बाजार में चारों तरफ हाहाकार का माहौल रहा. सारे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे. इस गिरावट में इन्वेस्टर्स ने चंद मिनटों के कारोबार में हजारों करोड़ गंवा दिए.

चार महीने के निचले स्तर पर बाजार

सुबह 10:30 बजे के आस-पास बीएसई सेंसेक्स करीब ढाई फीसदी टूटकर 55,663 अंक के आस-पास रहा. यह 20 अगस्त के बाद का सबसे निचला स्तर है. तब सेंसेक्स 55,329.32 अंक पर रहा था. एनएसई निफ्टी भी करीब ढाई फीसदी गिरकर चार महीने के निचले स्तर 16,570 अंक के पास तक गिर गया. इस दौरान बैंक निफ्टी करीब 1200 अंक टूट गया.

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नए साल से पहले लौट रही है पाबंदियां

भारत में ओमिक्रॉन के मामले अब तक 150 को पार कर चुके हैं. पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के 6,500 से अधिक मामले सामने आ हैं. वैश्विक स्तर पर देखें तो कई यूरोपीय देश नई लहर की चपेट में आ चुके हैं. नीदरलैंड ने बढ़ते मामलों को देखते हुए रविवार को फिर से लॉकडाउन लगाने का फैसला किया. ब्रिटेन में पिछले एक सप्ताह में ओमिक्रॉन के मामले 52 फीसदी बढ़े हैं. फ्रांस की सरकार ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ओमिक्रॉन का संक्रमण बिजली की रफ्तार से फैल रहा है. क्रिसमस और नए साल से पहले पाबंदियों की आहट से इकोनॉमिक ग्रोथ पर सकंट के बादल छा गए हैं. इन्वेस्टर इस कारण डरे हुए हैं और तेजी से बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं.

 

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