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पहले से खस्ताहाल BSNL की सेहत के लिए भारी पड़ रहा आत्मनिर्भर भारत अभियान!  

BSNL के 4जी नेटवर्क के लिए घरेलू कंपनियां जो टेंडर डाल रही हैं, वह पहले चीनी कंपनियों के द्वारा डाले जाने वाले सबसे कम कीमत के टेंडर से करीब 90 फीसदी ज्यादा है. बीएसएनएल की आर्थिक हालत पहले से ही खस्ता है, पिछले कई साल से उसे हजारों करोड़ रुपये के घाटे का सामना करना पड़ रहा है. 

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BSNL को आत्मनिर्भर भारत से नुकसान होने की आशंका
BSNL को आत्मनिर्भर भारत से नुकसान होने की आशंका
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान से BSNL के लिए मुश्किल
  • उसने चीनी कंपनियों के टेंडर रद्द कर दिये हैं
  • बीएसएनएल की आर्थिक हालत पहले से खराब है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ही मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की है. यह देश की इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए उठाया गया कदम है, लेकिन यह अभियान सार्वजनिक कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के लिए भारी पड़ रहा है. 

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90 फीसदी महंगा टेंडर 

असल में BSNL के 4जी नेटवर्क के लिए घरेलू कंपनियां जो टेंडर डाल रही हैं, वह पहले चीनी कंपनियों के द्वारा डाले जाने वाले सबसे कम कीमत के टेंडर से करीब 90 फीसदी ज्यादा है. गौरतलब है कि बीएसएनएल की आर्थिक हालत पहले से ही खस्ता है, पिछले कई साल से उसे हजारों करोड़ रुपये के घाटे का सामना करना पड़ रहा है. 

इस साल जुलाई में बीएसएनएल ने हुवावे और जेटीई जैसी चीनी कंपनियों के टेंडर रद्द कर दिये थे. सीमा पर तनाव और देश में राष्ट्रवादी भावनाएं बढ़ने के माहौल को देखते हुए यह टेंडर रद्द किये गये थे. 

नीति आयोग ने जून महीने में तीन दर्जन स्वदेशी ओरिजिनल इक्विपमेंट मेकर्स (OEMs), बीएसएनएल और दूरसंचार विभाग के साथ एक बैठक की थी, जिसमें इस बात पर विचार किया गया था कि स्वदेशी क्षमताओं के आधार पर बीएसएनएल के 4G नेटवर्क का विकास किस तरह से किया जा सकता है. इसके बाद ही चीनी कंपनियों के टेंडर रद्द किये गये थे. 

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BSNL प्रबंधन टेलीकॉम गियर के स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का इच्छुक तो है, लेकिन उसने यह साफ कर दिया है कि उसके पास प्रयोग के लिए धन नहीं है और स्थानीय ओईएम को रेडी टू यूज उत्पाद तैयार करने में अपनी काबिलियत दिखानी होगी. 

काबिलियत दिखानी होगी 

सच तो यह है कि स्थानीय कंपनियां विदेशी वेंडर की कीमत का मुकाबला नहीं कर पा रहीं. बीएसएनएल द्वारा चीनी कंपनियों के टेंडर रद्द करने के बाद इन कंपनियों ने यह भरोसा दिलाया था कि सरकार सही माहौल दे तो वे भी अगले कुछ साल में चीनी कंपनियों की जगह ले सकती है. लेकिन कीमत में करीब 90 फीसदी तक के अंतर को देखते हुए ऐसा लगता नहीं कि बीएसएनल यह भारी बोझ वहन कर पाएगी. 

दिग्गजों से कैसे होगा मुकाबला 

बीएसएनएल वैसे ही 4जी में देर से उतर रही है, इसलिए कायदे से तो उसे किफायती उत्पाद खरीदना चाहिए था. महंगे उत्पाद खरीदकर वह इस बाजार में जमे बड़े-बड़े निजी दिग्गजों को कैसे चुनौती दे पाएगी. 

नीति आयोग की बैठक में बीएसएनएल के सीएमडी पीके पवार ने कहा था, 'बीएसएनल की स्थिति गंभीर है और हम ऐसे रास्ते तलाश रहे हैं जिनसे एक बार फिर इस बाजार में प्रतिस्पर्धी रह सके. बीएसएनल के पास पहले से ही काफी सामाजिक जिम्मेदारी है जो निजी सेक्टर के उपर नहीं होती. इसलिए इसका प्रतिस्पर्धी रहना बहुत जरूरी है.' 

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(www.businesstoday.in/ से साभार) 

 

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