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केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ा, सब्सिडी में कटौती से जून में राहत

पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के घाटे की तुलना में इस बार केंद्र सरकार के वित्तीय घाटे में 28.3 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. हालांकि, जून महीने में सरकार के घाटे में गिरावट आई है. मई में सरकार ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद, उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस पर टैक्स में कौटती की थी.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सरकार ने सब्सिडी पर खर्च किया कम
  • जून महीने में घाटे में गिरावट आई

पिछले साल के मुकाबले इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) में भारत का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ा है. कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (Controller General of Accounts) ने आज केंद्र सरकार (Central Government) के वित्तीय घाटे के आंकड़े जारी कर दिए हैं. वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही अप्रैल-जून (April June) की अवधि में केंद्र सरकार का वित्तीय घाटा 3.52 लाख करोड़ रुपये रहा है. यह सरकार के पूरे साल के लक्ष्य का 21.2 फीसदी है. वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के आंकड़े को देखें, तो वित्तीय घाटा 2.74 लाख करोड़ रुपये रहा था.

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जून महीने में गिरावट

पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के घाटे की तुलना में इस बार केंद्र सरकार के वित्तीय घाटे में 28.3 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए वित्तीय घाटे का लक्ष्य 16.61 लाख करोड़ रुपये रखा है. हालांकि, जून महीने में सरकार के घाटे में गिरावट आई है. सालाना आधार पर यह 1.51 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.48 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है.

टैक्स कलेक्शन में इजाफा

इस गिरावट के पीछे सब्सिडी (Subsidy) पर कम खर्च और अधिक टैक्स कलेक्शन (Tax Collection) रहा है. जून 2022 में केंद्र सरकार का रेवेन्यू खर्च वार्षिक आधार पर 2.95 लाख करोड़ रुपये से घटकर 2.94 लाख रुपये पर आ गया है. वहीं, टैक्स से होने वाली कमाई में इजाफा हुआ है. यह 2.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है.

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राजकोषीय घाटा का अनुमान

इस वित्त वर्ष जून की तिमाही में केंद्र सरकार ने कुल 9,47,911 करोड़ रुपये खर्च किए. यह 2022-23 के बजट अनुमान का 24 फीसदी है. बीते वित्त वर्ष 2021-22 में यह बजट अनुमान का 23.6 फीसदी रहा था. सरकार का राजकोषीय घाटा 2022-23 के लिए 16,61,196 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.

सब्सिडी खर्च हुआ कम

खाद्य और उर्वरकों सहित प्रमुख सब्सिडी पर सरकार का खर्च अप्रैल-जून की अवधि के दौरान लगभग 68,000 करोड़ रुपये कम हो गया. वहीं, एक साल पहले यह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक थी. मई में सरकार ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद, उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस पर टैक्स में कौटती की थी.

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