भारत में खासकर प्रीमियम बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड बाजार में सिटी बैंक (Citibank India) काफी लोकप्रिय रहा है. लेकिन अब बैंक भारत से अपने रिटेल कारोबार को समेटने जा रहा है. इससे बहुत से लोग इन सवालों को लेकर परेशान हैं कि आखिर सिटी बैंक के ग्राहकों और क्रेडिट कार्ड धारकों का क्या होगा?
सिटी बैंक ने भारत सहित 13 बाजारों से अपना कंज्यूमर रिटेल बिजनेस समेटने का ऐलान किया है. इसका मतलब यह है कि सिटी बैंक भारत से खुदरा बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, वेल्थ मैनेजमेंट, लोन जैसे कारोबार बेच देगा. भारत में इसका कारोबार करीब 2.18 लाख करोड़ रुपये का है. यह भारत में सक्रिय सबसे बड़े और सबसे पुराने विदेशी बैंक में से है. Citibank India की भारत में करीब 119 साल पहले 1902 में कोलकाता में शुरुआत हुई थी.
क्या होगा मौजूदा ग्राहकों का
सिटी बैंक के बैंक ग्राहक को ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि जो भी बैंक यह कारोबार खरीदेगा ग्राहक उससे जुड़ जाएंगे. अभी बैक ने कहा है कि वह ग्राहकों को तब तक सेवाएं देता रहेगा, जब तक कोई नया बैंक उसके रिटेल बैंकिंग कारोबार का अधिग्रहण नहीं कर लेता. इसके बाद अधिग्रहण करने वाला बैंक इसके ग्राहकों को सेवाएं देगा.
सिटी बैंक अपना क्रेडिट कार्ड कारोबार एक या कई बैंकों को बेच सकता है. इसी वजह से आज शेयर बाजार में एसबीआई कार्ड के शेयर चढ़ गए. यह करीब 8 फीसदी की तेजी के साथ 976 रुपये के आसपास पहुंच गया. यह उम्मीद की जा रही है कि एसबीआई कार्ड को इसका बड़ा हिस्सा मिल सकता है.
जो भी हो सिटीबैंक अपने ग्राहकों को इसकी जानकारी देगा. उन्हें कोई समस्या नहीं आएगी. वे चाहें तो अपना क्रेडिट कार्ड फुल ऐंड फाइनल करके बंद करवा सकते हैं या उसे नई कंपनी के साथ जारी रख सकते हैं.
सिटी बैंक के सिटी गोल्ड क्लाइंट इसके सबसे प्रीमियम ग्राहक माने जाते हैं. इन ग्राहकों को बैंक दुनियाभर में उनकी अंतरराष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करता है. जानकारों का मानना है इन ग्राहकों की सेवा के लिए बैंक कारोबार खरीदने वाले नए बैंक से डील कर सकता है, ताकि आगे भी ऐसे ग्राहकों की अंतरराष्ट्रीय जरूरतों को पूरा किया जाता रहे.
क्यों जा रहा बाहर
बैंक भारत में उस पैमाने पर कंज्यूमर बैंकिंग का विस्तार नहीं कर पाया जितना उसे चाहिए था. रिजर्व बैंक ने विदेशी बैंकों को फ्रेंचाइजी मॉडल पर विस्तार की सुविधा दी है, लेकिन सिर्फ सिंगापुर का DBS ऐसा कर पाया है. सिटी बैंक ने 2000 के दशक में तो भारत में काफी विस्तार किया, लेकिन साल 2008 की मंदी के बाद से यह ज्यादा विस्तार नहीं कर पाया. बैंक की फिलहाल ज्यादातर बड़े शहरों में तीन दर्जन से ज्यादा शाखाएं हैं.