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कोरोना के दौर में भी हेल्थ रिसर्च पर सिर्फ 3.7 फीसदी खर्च, संसदीय समिति ने उठाए सवाल

कोरोना महामारी के दौरान भी हेल्थ रिसर्च पर खर्च स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कुल बजट का महज 3.7 फीसदी हुआ. इसको लेकर एक संसदीय समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं. भारत में हेल्थ पर रिसर्च कार्य स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) के  नेतृत्व में होता है.

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हेल्थ रिसर्च पर खर्च बहुत कम
हेल्थ रिसर्च पर खर्च बहुत कम
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हेल्थ पर रिसर्च के लिए बजट कम
  • संसदीय समिति ने उठाए सवाल
  • कोरोना के दौर में इसे चिंताजनक बताया

भारत में हेल्थ रिसर्च पर खर्च बहुत कम होता है. कोरोना महामारी के दौरान भी हेल्थ रिसर्च पर खर्च स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कुल बजट का महज 3.7 फीसदी हुआ. इसको लेकर एक संसदीय समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं.

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गौरतलब है कि भारत में हेल्थ पर रिसर्च कार्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाले स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) के  नेतृत्व में होता है. सपा नेता राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने कहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2020-21 में अपने बजट का महज 3.7 फीसदी हिस्सा हेल्थ रिसर्च पर खर्च किया है. जीडीपी के हिस्से के रूप में देखें तो यह खर्च महज 0.02 फीसदी ही  है. 

क्या कहा कमिटी ने 

संसद की स्थायी समिति ने यह पाया है कि हेल्थ रिसर्च के लिए बजटीय आवंटन बहुत कम किया जाता है और जो फंड मिलता है उसका भी इस्तेमाल बहुत कम होता है. यहां तक कि इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) जैसी संस्था भी अपने फंड का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाई जिसके ऊपर कोविड 19 के लिए रिसर्च करने का दारोमदार है. उसके पास स्टाफ और रिसर्च कमिर्यों की भारी कमी है. 

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क्या होगा असर

संसद के पटल पर सोमवार को रखी गई इस रिपोर्ट में आवंटित फंड के पूरा इस्तेमाल न होने पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि इसका काफी नकारात्मक असर होगा, क्योंकि इसकी वजह से अगले साल वित्त मंत्रालय प्रावधान और घटा देगा. 
 
रिपोर्ट में कहा गया है, 'कमिटी यह समझने में विफल रही है कि अगर दुनिया भर को तबाह करने वाले महामारी के बाद भी हेल्थ रिसर्च पर खर्च नहीं बढ़ाया जाता है, तो आख‍िर कब हमारे नीति नियंता डीएचआर के लिए पर्याप्त फंड देने को प्रेरित होंगे?'  

समिति ने कहा है कि ऐसे महत्वपूर्ण समय में आईसीएमआर जैसी संस्था में भला स्टाफ की कमी कैसे बनाए रखी जा सकती है? समिति के अनुसार ICMR के लिए कुल 876 पद मंजूर किए गए हैं, लेकिन इनमें से फिलहाल सिर्फ 600 पोस्ट भरे गए हैं. कमिटी ने सिफारिश की है कि सरकार को DHR के लिए कम से कम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का 5 फीसदी बजट आवंटित करने का प्रयास करना चाहिए. 

मिला बजट भी नहीं कर पाए खर्च 

समिति ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि 2020-21 के संशोध‍ित अनुमानों के मुताबिक DHR के लिए 4062.30 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन 10 फरवरी, 2021 तक इसका महज 74% हिस्सा ही खर्च किया जा सका है. इसी तरह ICMR को आवंटित 1594.46 करोड़ रुपये के बजट में से 31 जनवरी तक केवल 1305.06 करोड़ रुपये खर्च किए जा सके हैं. 

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