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कोरोना: देश को मिलती रहे ऑक्सीजन, इसके लिए मारुति ने उठाया ये अहम कदम

देश में ऑक्सीजन की भारी किल्लत अब भी बनी हुई है. ऐसे में जरूरतमंदों तक ऑक्सीजन पहुंचती रहे इसके लिए देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने ये अहम कदम उठाया है.

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ऑक्सीजन उपलब्धता बढ़ाने के लिए आगे आई मारुति (फाइल फोटो)
ऑक्सीजन उपलब्धता बढ़ाने के लिए आगे आई मारुति (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • टाटा, रिलायंस, जिंदल स्टील की कतार में आई मारुति
  • कलपुर्जा कारखानों में उपयोग होती है अधिक ऑक्सीजन
  • ‘उपलब्ध ऑक्सीजन लोगों की जान बचाने में काम आए’

मारुति सुजुकी इंडिया एक कार कंपनी के तौर पर बहुत कम मात्रा में ऑक्सीजन का उपयोग करती है. लेकिन उसकी कारों के लिए कलपुर्जे बनानी वाली कंपनियों के कारखानों में अधिक मात्रा में ऑक्सीजन का उपयोग होता है. इन कारखानों की ऑक्सीजन को भी कोरोना मरीजों की जान बचाने में उपयोग किया जा सके इसके लिए ही कंपनी ने ये कदम उठाया है.

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समय से पहले करेगी मेंटिनेंस
मारुति सुजुकी हर दो साल में अपने कारखानों का मेंटिनेंस करती है. इस साल कंपनी ने इसके लिए जून का वक्त तय किया था. लेकिन अब कंपनी इसे 1 से 9 मई के बीच करेगी.

क्या फायदा होगा मारुति के इस कदम से
देश में ऑक्सीजन की तत्काल जरूरत है. यदि मारुति जैसी देश की सबसे बड़ी कार कंपनी जून में तय समय पर अपना मेंटिनेंस करती तो मई महीने में उसके संयंत्रों में उत्पादन चलता रहता और इसके लिए कलपुर्जा कंपनियों के पास उपलब्ध ऑक्सीजन क्षमता का उपयोग कोरोना के मरीजों के लिए नहीं हो पाता, क्योंकि उन्हें मारुति के लिए कलपुर्जो का ही उत्पादन करना पड़ता. लेकिन मारुति के अपने मेंटिनेंस को समय से पहले करने से इन संयंत्रों की ऑक्सीजन को मेडिकल इस्तेमाल में लाया जा सकता है.

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बंद रहेंगे कंपनी के हरियाणा, गुजरात संयंत्र
मारुति सुजुकी ने एक बयान में कहा, ‘हमारा मानना है कि मौजूदा स्थिति में सारी उपलब्ध ऑक्सीजन लोगों की जान बचाने में काम आनी चाहिए. इसलिए मारुति ने अपने कारखानों के मेंटिनेंस को समय से पहले पूरा करने का निर्णय किया है. इसके वजह से कंपनी के सभी कारखानों में 1 से 9 मई के बीच उत्पादन बंद रहेगा. सुजुकी मोटर गुजरात ने भी अपने कारखाने को बंद रखने का निर्णय किया है.’

और कंपनियां भी कर रही ऑक्सीजन की आपूर्ति
इससे पहले देश की कई कंपनियों ने उनके कारखानों में उपयोग होने वाले ऑक्सीजन को मेडिकल उपयोग के लिए देने का निर्णय किया है. इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा, जेएसडब्ल्यू स्टील और जिंदल स्टीज एंड पावर इत्यादि शामिल हैं. इन कंपनियों ने अपने ऑक्सीजन उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी की है.

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